अंधेरे हॉल का कड़वा सच: Hyderabad cinema fined 75000 का यह ऐतिहासिक फैसला तब सामने आया जब सिनेमाघर के पर्दे पर दर्शकों को फिल्म के बदले लगातार विज्ञापनों का जाल झेलना पड़ा। टिकट की तय समय-सीमा बीत जाने के बावजूद जब 22 मिनट तक फिल्म शुरू नहीं हुई, तो दर्शकों के सब्र का बांध पूरी तरह टूट गया।
देर रात का वो शो: यह चौंकाने वाला मामला 20 जून 2025 का है, जब 33 वर्षीय एक दर्शक अपने दोस्त के साथ अभिनेता धनुष और नागार्जुन की फिल्म ‘कुबेरा’ देखने पहुंचा था। रात 10:35 बजे के निर्धारित शो के लिए वे 10:30 बजे हॉल में दाखिल हो चुके थे, लेकिन स्क्रीन पर रात 10:52 बजे तक केवल कमर्शियल विज्ञापन ही चलते रहे।
घर लौटने में हुई भारी देरी: विज्ञापन के इस लंबे सिलसिले के चलते पूरा शो तय वक्त से काफी पिछड़ गया और दर्शक को अपने घर पहुंचते-पहुंचते तड़के 3 बज गए। इस भारी असुविधा और समय की बर्बादी के खिलाफ पीड़ित ने झुकने के बजाय सीधे जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग की चौखट पर दस्तक दे दी।
आयोग का फैसला: Hyderabad cinema fined 75000 का कड़ा सबक
सिनेमा प्रबंधन की दलीलें खारिज: थियेटर प्रबंधन ने दलील दी कि विज्ञापन दिखाना बिजनेस मॉडल और जनसेवा का सामान्य हिस्सा है, जिसे अदालत ने सिरे से खारिज कर दिया। आयोग ने साफ कहा कि जन-जागरूकता से जुड़े संदेश अधिकतम 2 मिनट तक ही दिखाए जा सकते हैं, उससे अधिक समय बर्बाद करना सीधे तौर पर अनुचित व्यापार व्यवहार है।
आयोग का बड़ा हर्जाना: 11 सितंबर 2026 को दिए अपने फैसले में अदालत ने स्पष्ट किया कि Hyderabad cinema fined 75000 की कार्रवाई व्यावसायिक मनमानी पर लगाम लगाने के लिए बेहद जरूरी थी। आयोग ने शिकायतकर्ता को मानसिक प्रताड़ना के लिए 20,000 रुपये और कानूनी खर्च के रूप में 5,000 रुपये अदा करने का आदेश दिया।
कल्याण कोष में जमा होगी पेनल्टी: सिनेमाघर को बाकी बची 50,000 रुपये की भारी राशि जिला उपभोक्ता कल्याण कोष में दंड के तौर पर जमा कराने का फरमान सुनाया गया है। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि Hyderabad cinema fined 75000 का यह आदेश देशभर के मल्टीप्लेक्स ऑपरेटरों को दर्शकों के कीमती समय का सम्मान करने की सख्त चेतावनी देता है।






