13 साल पुराना सस्पेंस खत्म: NSEL Scam के जाल में फंसे हजारों बेबस निवेशकों के लिए आखिरकार वह निर्णायक मोड़ आ ही गया, जिसका इंतजार एक दशक से ज्यादा समय से किया जा रहा था। मुंबई की स्पेशल PMLA कोर्ट ने प्रवर्तन निदेशालय (ED) को जब्त की गई लगभग 3,464 करोड़ रुपये की भारी-भरकम संपत्ति बेचने की हरी झंडी दे दी है। इस ऐतिहासिक फैसले के जरिए 5,682 तय निवेशकों को 1,950 करोड़ रुपये का एकमुश्त सेटलमेंट मिलने का रास्ता पूरी तरह साफ हो गया है।
अदालत का कड़ा फैसला: NCLT मुंबई द्वारा पहले से मंजूर की गई इस सेटलमेंट योजना को लागू करने के लिए ED अब MPID एक्ट की सक्षम अथॉरिटी के साथ मिलकर इन संपत्तियों की नीलामी प्रक्रिया शुरू करेगी। नीलामी से हासिल 1,950 करोड़ रुपये निवेशकों की प्रतिनिधि कंपनी ’63 मून्स टेक्नोलॉजीज लिमिटेड’ को सौंपे जाएंगे। इसके तहत प्रत्येक पात्र निवेशक को उसके सत्यापित क्लेम का कम से कम 42 प्रतिशत हिस्सा वापस मिलना तय माना जा रहा है।
NSEL Scam की वो काली हकीकत जिसने बाजार हिला दिया
कागजों पर हुआ फर्जीवाड़ा: साल 2013 में मुंबई के एमआरए मार्ग थाने में दर्ज FIR के बाद आर्थिक अपराध शाखा (EOW) की जांच में NSEL Scam से जुड़े एक बड़े वित्तीय षड्यंत्र का पर्दाफाश हुआ था। एक्सचेंज के डायरेक्टर्स और 25 डिफॉल्टिंग मेंबर्स ने बिना किसी वास्तविक वेयरहाउस स्टॉक के कमोडिटीज ट्रेडिंग कराई, जिसके चलते 13,000 निवेशकों के लगभग 5,600 करोड़ रुपये डूब गए थे।
ED का कानूनी शिकंजा: मनी लॉन्ड्रिंग की जांच संभालते हुए ED ने कड़े कानूनी कदम उठाए और 35 प्रोविजनल अटैचमेंट ऑर्डर्स जारी कर कुल 3,464 करोड़ रुपये मूल्य की संपत्तियां कुर्क कर लीं। नवंबर 2025 में NCLT ने जिस 1,950 करोड़ रुपये के सेटलमेंट को स्वीकृति दी थी, उस पर 92 प्रतिशत से अधिक क्रेडिटर्स की मुहर लगी थी। NCLAT और सुप्रीम कोर्ट दोनों ने ही इस योजना के खिलाफ दायर आपत्तियों को खारिज कर तुरंत भुगतान का आदेश दिया था।
अतिरिक्त रकम पर कोर्ट की नजर: ED ने कोर्ट में स्पष्ट एनओसी (NOC) देते हुए यह साफ किया कि यदि संपत्तियों की नीलामी से 1,950 करोड़ रुपये से ज्यादा रकम प्राप्त होती है, तो अतिरिक्त पैसा स्पेशल कोर्ट की कस्टडी में सुरक्षित रहेगा। इससे पहले भी सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित जस्टिस (रिटायर्ड) प्रदीप नंदराजोग कमेटी के जरिए 17.47 करोड़ रुपये निवेशकों को बांटे जा चुके हैं। एजेंसी का रुख साफ है कि अपराध की कमाई को जब्त कर पीड़ितों तक उनका हक पहुंचाना ही सर्वोच्च प्राथमिकता है।






