रहस्यमयी शुरुआत का सफर: Praful Dave आज भले ही मुख्यधारा की चकाचौंध से दूर नजर आते हों, लेकिन 70 के दशक में मेडिकल की सुरक्षित नौकरी छोड़कर संगीत के जोखिम भरे रास्ते पर कदम बढ़ाना हर किसी को चौंका गया था। एक सफल डॉक्टर का पेशा त्यागकर उन्होंने सुरों की साधना को अपना जीवन बना लिया।
आशा भोसले संग पहला बड़ा धमाका: Praful Dave जब पहली बार ‘मनियारो’ गाना गाने पहुंचे, तब म्यूजिक डायरेक्टर उनकी दमदार आवाज सुनकर दंग रह गए। डायरेक्टर ने तुरंत फैसला किया और उन्हें दिग्गज गायिका आशा भोसले के साथ डुएट रिकॉर्ड करने का सुनहरा मौका थमा दिया।
अवॉर्ड्स की झड़ी और पहली कामयाबी: आशा भोसले के साथ उनका गाया गुजराती गीत ‘मारू वनरावन छे रुडु’ रिलीज होते ही जबरदस्त हिट साबित हुआ। इस गीत की लोकप्रियता का आलम यह रहा कि इसने राज्य सरकार का प्रतिष्ठित अवॉर्ड और पीपल्स चॉइस अवॉर्ड दोनों अपने नाम किए।
Praful Dave और नाना पाटेकर का ब्लॉकबस्टर भजन
बॉलीवुड में गरबा थीम का जादू: Praful Dave ने वर्ष 1994 में रिलीज हुई कल्ट फिल्म ‘क्रांतिवीर’ में अपनी जोशीली आवाज का जादू बिखेरा। इस फिल्म के सुपरहिट गुजराती थीम आधारित भक्ति गीत ‘मां अंबे जय जगदंबे’ ने देश भर के पंडालों में नई ऊर्जा भर दी थी।
परदे पर दिग्गज कलाकारों का रंग: इस प्रसिद्ध भक्ति गीत पर अभिनेता नाना पाटेकर और डिंपल कपाड़िया डांडिया और गरबा खेलते दिखाई दिए थे। प्रफुल की बुलंद आवाज ने पर्दे पर नाना पाटेकर के उस गरबा सीक्वेंस को हमेशा के लिए अमर बना दिया।
बॉलीवुड से दूरी और मंच की रौनक: Praful Dave ने 90 के दशक के बाद बॉलीवुड फिल्मों में गाने रिकॉर्ड नहीं किए, जिससे दर्शक उनकी गैरमौजूदगी पर सवाल उठाते रहे। पांच दशकों तक संगीत की सेवा करने वाले यह दिग्गज कलाकार आज भी लाइव स्टेज शोज और सोशल मीडिया पर पूरी तरह सक्रिय हैं।







