दहशत का वह खौफनाक मंजर: मुजफ्फरपुर कैंडल फैक्ट्री अग्निकांड ने उस वक्त पूरे मालीघाट नाका रोड को हिलाकर रख दिया, जब अचानक आग की ऊंची लपटों और धुएं के गुबार ने चारों तरफ चीख-पुकार मचा दी। 16 अक्टूबर 2026 की सुबह दीपक इंडस्ट्रीज नामक इस मोमबत्ती इकाई में हुआ यह हादसा पलक झपकते ही बेकाबू हो गया।
सिलेंडर ब्लास्ट और पैराफिन मोम: ज्वलनशील मोम ने पकड़ी भीषण आग, क्योंकि मोमबत्ती निर्माण में इस्तेमाल होने वाला भारी मात्रा में पैराफिन मोम वहां मौजूद था। स्थानीय सूत्रों के अनुसार फैक्ट्री में व्यावसायिक के बदले घरेलू गैस सिलेंडर का उपयोग किया जा रहा था, जिसमें अचानक विस्फोट होने से आग प्रचंड हो गई।
मालिक की जान पर बनी आफत: हादसे में संचालक बुरी तरह झुलसा, जब फैक्ट्री मालिक दीपक कुमार आग बुझाने की कोशिश में लपटों के बीच घिर गए। गंभीर रूप से घायल अवस्था में उन्हें तुरंत नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उनकी हालत नाजुक बनी हुई है।
चाइल्ड लेबर का संगीन आरोप: नाबालिग मजदूरों की चर्चा से हड़कंप, जहां स्थानीय लोगों का दावा है कि इस असुरक्षित परिसर में छोटे-छोटे बच्चों से भी काम कराया जाता था। घटना के बाद इस संवेदनशील पहलू पर प्रशासन की कथित चुप्पी को लेकर भी तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं।
मुजफ्फरपुर कैंडल फैक्ट्री अग्निकांड: अग्निशमन विभाग और सुरक्षा दावों की खुली पोल
दमकल विभाग की भारी लापरवाही: आधा किलोमीटर की दूरी फिर भी देरी, जबकि अग्निशमन केंद्र महज 500 मीटर की दूरी पर स्थित था। स्थानीय निवासियों का आरोप है कि सूचना देने के बावजूद दमकल वाहन को पहुंचने में 30 मिनट से अधिक समय लग गया, जिससे आग पूरी फैक्ट्री में फैल गई।
सुरक्षा मानकों और एनओसी की अनदेखी: अवैध संचालन पर गहराया रहस्य, क्योंकि मौके पर अग्निशमन उपकरण या आपातकालीन निकास के कोई पुख्ता इंतजाम नहीं दिखे। अग्निशमन विभाग के पास इस बात का कोई रिकॉर्ड नहीं था कि इस फैक्ट्री को वैध एनओसी जारी की गई थी या यह नियमों को ताक पर रखकर चल रही थी।
बगल में गैस गोदाम और मंडराता खतरा: एक चिंगारी से टला महाविनाश, क्योंकि मालीघाट नाका रोड के घने रिहायशी इलाके के पास कई गैस गोदाम भी स्थित हैं। मुजफ्फरपुर कैंडल फैक्ट्री अग्निकांड यदि थोड़ी देर और अनियंत्रित रहता, तो आसपास के गैस भंडारों तक लपटें पहुंचकर पूरे शहर के लिए खौफनाक तबाही का सबब बन सकती थीं।





