Tuhi Farms की नींव रखने वाले इंजीनियर दंपति के एक चौंकाने वाले फैसले ने कॉर्पोरेट जगत के आरामदायक दफ्तरों से लेकर गांव की पगडंडियों तक सबको हैरान कर दिया। मैकेनिकल इंजीनियर रश्मि सचान और एनआईटी वारंगल से पासआउट सॉफ्टवेयर प्रोफेशनल अंकुर सचान ने लाखों के पैकेज वाली नौकरी छोड़कर मिट्टी से जुड़ने का कठिन रास्ता चुना। पिता की प्रेरणा से उपजे इस विचार ने कानपुर के घाटमपुर स्थित भीतरगांव ब्लॉक के चतुरी पुरवा में जन्म लिया।
सपनों का नया ठिकाना Tuhi Farms नाम दोनों बेटियों के नामों को जोड़कर रखा गया, जिसकी औपचारिक योजना वर्ष 2021 में बनी और 2022 से खेती की जमीन पर वास्तविक कार्य शुरू हुआ। 5.5 एकड़ के इस भूखंड पर दंपत्ति ने पारंपरिक खेती के बजाय आधुनिक एग्रोफॉरेस्ट्री और प्राकृतिक खेती का एक क्रांतिकारी मॉडल विकसित किया। आज यह फार्म रासायनिक खादों से पूरी तरह मुक्त होकर शुद्ध और पौष्टिक पैदावार का केंद्र बन चुका है।
बहुफसली एग्रोफॉरेस्ट्री का वैज्ञानिक मॉडल Tuhi Farms की जमीन पर 30 से अधिक किस्मों के पेड़-पौधों के साथ बहुफसली चक्र का संतुलन साधा गया है। फार्म में आम, अमरूद, अनार, मौसमी, आंवला और चीकू के फलदार बागों के साथ सागवान जैसे कीमती इमारती पेड़ और गेंदे के फूल लहलहा रहे हैं। पेड़ों के बीच की खुली जमीन पर दलहन, तिलहन और हल्दी की सह-फसली बुवाई कर जमीन के हर हिस्से का वैज्ञानिक उपयोग किया जा रहा है।
हल्दी और सरसों से शानदार मुनाफा Tuhi Farms में एक बीघे में उगाई गई प्राकृतिक हल्दी से करीब 18 क्विंटल की पैदावार मिलती है, जिससे लगभग डेढ़ लाख रुपये का शुद्ध लाभ अर्जित होता है। वहीं तीन एकड़ में तैयार सरसों से करीब 21 क्विंटल का उत्पादन होता है, जिसे सीधे शुद्ध तेल में प्रोसेस कर बेचा जाता है। इसके साथ ही अरहर, मूंग, उड़द, चना और औषधीय गुणों से युक्त माने जाने वाले वंशी किस्म के गेहूं का आटा तैयार होता है।
बिचौलियों का खात्मा और आत्मनिर्भर ब्रांड Tuhi Farms के संचालन में उत्पादन से लेकर प्रोसेसिंग, पैकेजिंग, ब्रांडिंग और ग्राहकों तक सीधी आपूर्ति का संपूर्ण जिम्मा दोनों इंजीनियर खुद संभालते हैं। सीधे उपभोक्ताओं तक उत्पाद पहुंचाने के इस मॉडल ने न केवल बिचौलियों का मुनाफा खत्म किया बल्कि गांव के 7 से 8 स्थानीय निवासियों को स्थायी रोजगार भी प्रदान किया। यह सफल प्रयोग साबित करता है कि यदि आधुनिक प्रबंधन को प्राकृतिक खेती से जोड़ा जाए, तो कृषि घाटे का नहीं बल्कि टिकाऊ मुनाफे का सबसे बड़ा जरिया बन सकती है।





