रहस्यमयी तरीके से बढ़ी नजदीकी:
Neha Bora अचानक विपक्षी मोर्चे के सबसे बड़े चेहरों के साथ अगली कतार में कैसे आ गईं, इस सवाल ने कांग्रेस के भीतर ही भारी सियासी बवंडर खड़ा कर दिया है। नई दिल्ली में स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) विवाद और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर कांग्रेस और ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) एक साथ विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। इस पूरे आंदोलन के केंद्र में AISA की अध्यक्ष नेहा बोरा दिखाई दे रही हैं।
मंच पर दिखी अनोखी साझेदारी:
Neha Bora जब वरिष्ठ नेता राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा के साथ मंच और रैलियों में प्रमुखता से नजर आईं, तो कांग्रेस की छात्र इकाई ‘नेशनल स्टूडेंट्स यूनियन ऑफ इंडिया’ (NSUI) के पदाधिकारियों के होश उड़ गए। पार्टी के अपने छात्र नेताओं को पीछे धकेलकर बाहरी वामपंथी संगठन की नेता को इतनी अहमियत मिलना किसी को हजम नहीं हुआ। NSUI कार्यकर्ताओं में इस बात को लेकर जबरदस्त असंतोष फैल गया।
Neha Bora और NSUI के बीच उपजा ताजा विवाद
व्हाट्सएप ग्रुप में फूटा गुस्सा:
Neha Bora को मिलती लगातार तवज्जो से तिलमिलाए NSUI के एक नाराज पदाधिकारी ने अपने आधिकारिक व्हाट्सएप ग्रुप का नाम बदलकर ‘वी द छोटू’ (WE THE Chhotu) कर दिया। यहां ‘छोटू’ शब्द का सांकेतिक अर्थ संगठन के भीतर सिर्फ काम-काज करने वाले उपेक्षित सहायक से था। यह मौन बगावत करीब तीन दिनों तक व्हाट्सएप ग्रुप पर जारी रही और इसकी गूंज सीधे कांग्रेस हाईकमान तक पहुंच गई।
हाईकमान के दखल से शांत हुआ पारा:
संगठन में गहराते असंतोष को देखते हुए NSUI के पदाधिकारियों ने राहुल गांधी से मुलाकात की और अपनी नाराजगी खुलकर सामने रखी। हाईकमान द्वारा शिकायत दूर करने का भरोसा मिलने के बाद ही उस ग्रुप का नाम वापस सामान्य किया गया। इस बैठक के दौरान NSUI के राष्ट्रीय अध्यक्ष विनोद जाखड़ सहित कई अन्य प्रमुख छात्र प्रतिनिधि भी मौजूद रहे।
सुप्रीम कोर्ट मार्च की अगली कतार:
Neha Bora बीते 12 अक्टूबर को हुए सुप्रीम कोर्ट मार्च के दौरान विपक्ष के शीर्ष नेताओं के साथ कदमताल करती दिखी थीं। उस मार्च में सबसे आगे चल रहीं दो प्रमुख महिलाओं में एक ओर कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा थीं, तो दूसरी ओर उनके दाईं तरफ नेहा बोरा चल रही थीं। उनके कंधों पर राहुल गांधी का हाथ था और वे उसी मुख्य बस व ट्रक पर भी सवार थीं जहां गिने-चुने शीर्ष नेता मौजूद थे।
आंदोलन का मुख्य चेहरा बनीं छात्रा नेता:
Neha Bora इस पूरे विरोध प्रदर्शन का सबसे चर्चित चेहरा बनकर उभरी हैं और कई मौकों पर वे चर्चा में रहने वाले अन्य समूहों से भी आगे नजर आईं। हालांकि, अपने ही नेताओं की अनदेखी से उपजी NSUI की यह नाराजगी साफ इशारा करती है कि चुनावी रणनीतियों में बाहरी चेहरों को आगे रखना कांग्रेस के भीतर ही आंतरिक खींचतान को जन्म दे रहा है।






