सस्पेंस भरा सफर और खाली हाथ लौटते यात्री
Kathgodam Festival Train Bookings को लेकर रेलवे स्टेशनों पर मची अफरा-तफरी ने हर किसी के रोंगटे खड़े कर दिए हैं, क्योंकि घर जाने की उम्मीदें अब केवल वेटिंग लिस्ट के फेर में उलझ कर रह गई हैं। नवरात्र से लेकर दिवाली और छठ महापर्व तक काठगोदाम से चलने वाली सभी प्रमुख ट्रेनें पूरी तरह से पैक हो चुकी हैं। यात्रियों ने महीनों पहले से अपनी सीटें पक्की करने की जद्दोजहद शुरू कर दी थी, लेकिन आज स्थिति यह है कि टिकट काउंटरों पर सिर्फ मायूसी हाथ लग रही है।
Kathgodam Festival Train Bookings का संकट और लंबी वेटिंग का खेल
ट्रेनों में रिग्रेट की स्थिति: काठगोदाम से दिल्ली, हावड़ा और लखनऊ जाने वाले लंबे रूटों पर हालात सबसे ज्यादा चिंताजनक बन चुके हैं। काठगोदाम से नियमित चलने वाली बाघ एक्सप्रेस और रानीखेत एक्सप्रेस के स्लीपर, थर्ड एसी और सेकंड एसी में वेटिंग 100 के आंकड़े को पार कर गई है। त्योहार के ऐन मौके पर स्थिति इतनी गंभीर हो चुकी है कि 20 अक्टूबर के आसपास कई श्रेणियों में ‘नो रूम’ और रिग्रेट के बोर्ड लग चुके हैं।
प्रमुख तारीखों पर वेटिंग का गणित: 16 से 20 अक्टूबर के बीच बाघ एक्सप्रेस के स्लीपर में 76 से 132 तक वेटिंग दर्ज की गई है, जबकि थर्ड एसी में भी 42 से 71 तक की वेटिंग है। रानीखेत एक्सप्रेस में 17 से 21 अक्टूबर के दौरान स्लीपर में 79 से 121 और थर्ड एसी में 50 से 69 तक वेटिंग चल रही है। 20 अक्टूबर को दशहरा, फिर नवंबर में धनतेरस, दिवाली, गोवर्धन पूजा, भाई दूज और उसके बाद पूर्वांचल का महापर्व छठ होने के कारण टिकट की हर आस टूटती नजर आ रही है।
सड़कों पर राहत और अतिरिक्त बसों की तैयारी: रेलवे के इस भारी दबाव के बीच हल्द्वानी बस अड्डे पर फिलहाल सामान्य दिनों जैसी स्थिति बनी हुई है। हल्द्वानी रोडवेज के एआरएम संजय पांडे के अनुसार, शुक्रवार को दिल्ली रूट पर भेजी गई 21 बसों में आधी सीटें खाली रहीं। हालांकि दिवाली और छठ के नजदीक आते ही भीड़ को संभालने के लिए दिल्ली व देहरादून के लिए अतिरिक्त बसें और बरेली, रामपुर व खटीमा रूट पर भी विशेष फेरे शुरू किए जाएंगे।





