रहस्यमयी जंगलों का नया मोड़: सोनेवानी टाइगर कॉरिडोर को लेकर मध्य प्रदेश सरकार ने आखिरकार एक ऐसा अप्रत्याशित फैसला ले लिया है, जिसने वर्षों से लटके संरक्षण के विवाद को अचानक सुलझा दिया। बालाघाट जिले के लालबर्रा क्षेत्र में स्थित करीब 163.195 वर्ग किलोमीटर के इस घने वन क्षेत्र को अब वन्यजीव अभयारण्य की जगह सीधे कंजर्वेशन रिजर्व बनाया जा रहा है।
बिना विस्थापन का सुरक्षित रास्ता: इस नए संरक्षण दर्जे की सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि बिना किसी गांव को उजाड़े और बिना खदानों को बंद किए ही बाघों की राह पूरी तरह सुरक्षित हो जाएगी। सोनेवानी टाइगर कॉरिडोर के भीतर मानवीय गतिविधियों के दबाव को संतुलित करते हुए अब संरक्षण आधारित आधुनिक प्रबंधन लागू किया जा रहा है।
सोनेवानी टाइगर कॉरिडोर और अभयारण्य योजना में बड़ा बदलाव
खदानों और विस्थापन का टकराव: पहले इस पूरे इलाके को वन्यजीव अभयारण्य घोषित करने का प्रस्ताव तैयार हुआ था, लेकिन प्रस्तावित इको-सेंसिटिव जोन के दायरे में कई खदानें और आबाद गांव आ रहे थे। खदान संचालकों की तीव्र आपत्तियों और ग्रामीणों के बड़े पैमाने पर संभावित विस्थापन के डर से यह योजना लंबे समय तक अधर में फंसी रही।
कंजर्वेशन रिजर्व का अंतिम फैसला: शासन ने सभी अड़चनों को भांपते हुए अभयारण्य का विचार त्यागकर कंजर्वेशन रिजर्व का विकल्प चुन लिया। मध्य प्रदेश शासन द्वारा प्रक्रिया पूरी करते ही सोनेवानी टाइगर कॉरिडोर प्रदेश का तीसरा आधिकारिक कंजर्वेशन रिजर्व बनकर इतिहास रच देगा।
ताप्ती और कागपुर के बाद तीसरी बड़ी उपलब्धि: इससे पूर्व बैतूल जिले में 20 अगस्त 2025 को 250 वर्ग किमी में ताप्ती कंजर्वेशन रिजर्व और 25 अगस्त 2026 को विदिशा के कागपुर में 0.535 वर्ग किमी का कागपुर पक्षी कंजर्वेशन रिजर्व घोषित किया जा चुका है। सोनेवानी टाइगर कॉरिडोर के इस नए दर्जे से न केवल कॉरिडोर की जैव विविधता बचेगी, बल्कि भविष्य में नियंत्रित सफारी और पर्यटन से स्थानीय लोगों के लिए नए अवसर भी पैदा होंगे।






