🌐 Language / भाषा
  • हिन्दी (Hindi)
  • বাংলা (Bengali)
  • ਪੰਜਾਬੀ (Punjabi)
  • ગુજરાતી (Gujarati)
  • मराठी (Marathi)
  • தமிழ் (Tamil)
  • తెలుగు (Telugu)
  • ಕನ್ನಡ (Kannada)
  • മലയാളം (Malayalam)
  • ଓଡ଼ିଆ (Odia)
  • اردو (Urdu)
  • অસમীয়া (Assamese)

2004 Train Robbery Compensation: 22 साल बाद NCDRC ने सुनाया फैसला, रेलवे को देना होगा मुआवजा

सनसनीखेज वारदात का फैसला: 2004 Train Robbery Compensation को लेकर राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग (NCDRC) ने एक ऐसा सनसनीखेज आदेश सुनाया है जिसने रेलवे की सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोल कर रख दी है। जस्टिस ए.पी. साही और सदस्य भरतकुमार पांड्या की पीठ ने अवध-असम एक्सप्रेस में हुई डकैती के मामले में रेलवे को सेवा में गंभीर लापरवाही का दोषी पाया है। आयोग ने पीड़ित यात्री को कानूनी खर्च समेत 20,000 रुपये का हर्जाना देने का सख्त आदेश जारी किया है।

आधी रात का खौफनाक मंजर: 26 अगस्त 2004 को उत्तर प्रदेश के बरेली निवासी मिस्टर सिंह अपनी बेटी के साथ हापुड़ से गुवाहाटी जाने के लिए अवध-असम एक्सप्रेस के स्लीपर कोच में सवार हुए थे। 28 अगस्त 2004 की रात करीब 3 बजे, जब ट्रेन असम के बारपेटा और रंगिया स्टेशन के बीच दौड़ रही थी, तभी 6 से 7 हथियारबंद बदमाश बोगी में दाखिल हो गए। लुटेरों ने लगभग 75 मिनट तक बंदूक की नोक पर पूरे डिब्बे में भारी तांडव मचाया।

लाखों के जेवरात और नकदी गायब: बदमाशों ने मिस्टर सिंह और उनकी बेटी से 59,725 रुपये मूल्य के सोने के जेवर, नकदी और टाइटन घड़ी लूट ली। इनमें 30 ग्राम की सोने की चेन, तीन अंगूठियां, सोने की बालियां और चार कंगन शामिल थे। इसके बाद लुटेरे रंगिया स्टेशन से ठीक पहले इमरजेंसी चेन खींचकर अंधेरे में फरार हो गए।

सुरक्षा नियमों की खुली अनदेखी: 2004 Train Robbery Compensation की मांग उठाते हुए पीड़ित ने बताया कि पूरी लूटपाट के दौरान कोच में कोई अटेंडेंट, टीटीई या आरपीएफ एस्कॉर्ट मौजूद नहीं था। रेलवे के नियमों के मुताबिक रात 10 बजे से सुबह 6 बजे तक आरक्षित कोच के दरवाजे बंद होने चाहिए, जिसका पालन नहीं किया गया। रंगिया जीआरपी में आईपीसी की धारा 395 के तहत डकैती का मुकदमा तो दर्ज हुआ, लेकिन आरोपी कोर्ट से बरी हो गए।

22 साल की लंबी कानूनी लड़ाई: पुलिस जांच से असंतुष्ट होकर पीड़ित ने 10 मार्च 2005 को उपभोक्ता अदालत का दरवाजा खटखटाया। आखिरकार 2004 Train Robbery Compensation के इस मुकदमे में साबित हुआ कि आरक्षित टिकट वाले यात्री को सुरक्षा देने में रेलवे पूरी तरह विफल रहा। आयोग ने आदेश दिया कि रेलवे दो माह के भीतर 20,000 रुपये का भुगतान करे, अन्यथा 6 प्रतिशत वार्षिक ब्याज देना होगा।

⚡ SHARE THIS POST

Related Posts

Bengaluru News: ‘बहुत ही अनसेफ फील हुआ’, बेंगलुरु की महिला ने Rapido Rider पर लगाया हाथ पकड़ने का आरोप; कंपनी ने की सख्त कार्रवाई

खौफनाक सफर की शुरुआत: Rapido Rider के साथ बेंगलुरु में सफर कर रही एक युवती के लिए सामान्य सी राइड उस वक्त डर में बदल गई, जब सफर के दौरान…

Read more

नेहा बोरा को राहुल और प्रियंका गांधी से मिली अहमियत तो भड़की NSUI, व्हाट्सएप ग्रुप का नाम बदलकर रखा ‘वी द छोटू’

रहस्यमयी तरीके से बढ़ी नजदीकी: Neha Bora अचानक विपक्षी मोर्चे के सबसे बड़े चेहरों के साथ अगली कतार में कैसे आ गईं, इस सवाल ने कांग्रेस के भीतर ही भारी…

Read more

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *