अदालत का तीखा रुख: SC slams FSSAI मामले में तब सनसनी फैल गई जब देश की सर्वोच्च अदालत ने पैकेज्ड फूड पर चेतावनी लेबल लगाने में हो रही लंबी देरी पर नियामक को आड़े हाथों लिया। नई दिल्ली में आम जनता की सेहत से सीधे जुड़े इस गंभीर विषय पर पीठ का रुख बेहद सख्त नजर आया।
न्यायाधीशों के कड़े सवाल: जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस के विनोद चंद्रन की पीठ ने सुनवाई के दौरान भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI) की भारी लेत-लतीफी पर भारी नाराजगी व्यक्त की। पीठ ने पूछा कि नागरिकों के स्वास्थ्य से जुड़े मामले में इतना लंबा वक्त बर्बाद क्यों किया जा रहा है।
चार वर्षों की देरी पर सवाल: SC slams FSSAI की इस कानूनी बहस में अदालत ने पूछा कि जब साल 2022 से इस पर काम चल रहा था, तो बीते चार सालों में क्या प्रगति हुई। नियामक द्वारा नए सिरे से आपत्तियां मांगने और एक साल के स्वैच्छिक अनुपालन की मांग पर भी जजों ने गहरी आपत्ति जताई।
हेक्सागोनल वार्निंग लेबल का प्रस्ताव: रेगुलेटर का नया मसौदा अधिक चीनी, फैट और नमक वाले डिब्बाबंद उत्पादों पर सफेद चौकोर बैकग्राउंड में लाल रंग का षट्कोणीय (Hexagonal) चेतावनी चिन्ह सामने लगाने की योजना पेश करता है। इसका मुख्य उद्देश्य ग्राहकों को अस्वास्थ्यकर खाद्य पदार्थों के प्रति फौरन सतर्क करना है।
नियम लागू होने की समय-सीमा: ड्राफ्ट प्रक्रिया की औपचारिकता पूरी करने में एफएसएसएआई ने अदालत से चार महीने का समय मांगा है, जिसे घरेलू पक्षों और विश्व व्यापार संगठन (WTO) के सुझावों के लिए 60 दिन तक सार्वजनिक रखा जाएगा। अधिसूचना के बाद कंपनियों को एक साल की स्वैच्छिक छूट देने का भी प्रावधान है।
याचिका पर फैसला सुरक्षित: 3एस एंड अवर हेल्थ सोसाइटी नामक पब्लिक चैरिटेबल ट्रस्ट की जनहित याचिका पर दोनों पक्षों की दलीलें पूरी हो चुकी हैं। इस याचिका में पैकेज्ड फूड पर फ्रंट-ऑफ-पैकेज लेबलिंग (FoPL) अनिवार्य करने की मांग की गई थी, जिसके बाद शीर्ष अदालत ने अपना आदेश सुरक्षित रख लिया।






