रहस्यमयी फैसले से हिला राजघराना Japan Imperial Succession Law को लेकर जापान की संसद ने एक चौंकाने वाला फैसला सुनाते हुए 19वीं सदी के शाही नियमों में संशोधन को मंजूरी दे दी है। इस सख्त कदम के तहत यह आधिकारिक रूप से तय कर दिया गया है कि सदियों पुराने शाही सिंहासन पर अब केवल पुरुष उत्तराधिकारी ही बैठ सकेंगे। इस ऐतिहासिक फैसले ने 1500 साल पुरानी वंशानुगत संस्था के अस्तित्व पर एक गहरा रहस्य और चिंता का माहौल खड़ा कर दिया है।
सिकुड़ते कुनबे पर मंडराता संकट नए नियमों के अनुसार अब भविष्य में गद्दी संभालने के लिए दूर के पुरुष रिश्तेदारों को गोद लेने और राजकुमारियों को आम नागरिकों से विवाह के बाद भी शाही दर्जा रखने की छूट दी गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस संशोधन से तेजी से घटते और बुजुर्ग होते शाही कुनबे के सामने एक अभूतपूर्व संकट खड़ा हो चुका है। वर्तमान में 16 वयस्क सदस्यों वाले इस राजघराने में महज पांच पुरुष बचे हैं, और महल में कोई नया बच्चा मौजूद नहीं है।
लोकप्रिय राजकुमारी आइको की उम्मीदें टूटीं Japan Imperial Succession Law के इस कड़े रुख के चलते मौजूदा 66 वर्षीय सम्राट नारुहितो की 24 वर्षीय बेटी राजकुमारी आइको के गद्दी संभालने की सभी संभावनाएं पूरी तरह खत्म हो गई हैं। जनता के बीच बेहद लोकप्रिय होने और भारी समर्थन मिलने के बावजूद, केवल एक महिला होने के कारण उन्हें इस सर्वोच्च पद की दौड़ से हमेशा के लिए बाहर कर दिया गया है।
हिसाहितो के कंधों पर गद्दी का भार Japan Imperial Succession Law के अंतर्गत अब सम्राट के छोटे भाई और उनके 19 वर्षीय भतीजे राजकुमार हिसाहितो ही मुख्य उत्तराधिकारी की कतार में सबसे आगे खड़े हैं। हिसाहितो पिछले चार दशकों के लंबे अंतराल में शाही परिवार में जन्म लेने वाले इकलौते लड़के हैं, जिनके बाद गद्दी की कतार में सम्राट के 90 वर्षीय चाचा आते हैं। सीमित विकल्पों के बीच यह देखना दिलचस्प होगा कि यह प्राचीन साम्राज्य भविष्य की चुनौतियों का सामना कैसे करता है।






