सनसनीखेज वारदात से दहला गांव
Deoria RSS Worker Murder की रूह कंपा देने वाली वारदात ने पूरे इलाके में सनसनी फैला दी, जब विवाद के बाद खूनी खेल का खौफनाक सच सामने आया। लार थाना क्षेत्र के भीखम छपरा गांव निवासी आरएसएस के खंड समरसता प्रमुख रामेश्वर तिवारी की 2 अक्टूबर को ब्रेकर बनाने के विवाद में पट्टीदारों ने लाठी-डंडों से बेरहमी से पिटाई कर दी थी। अस्पताल में इलाज के दौरान गंभीर चोटों के कारण उन्होंने दम तोड़ दिया।
बेटे की शिकायत पर एक्शन
पिता के कत्ल के बाद उनके बेटे विकास तिवारी ने सरकारी जमीन पर अवैध कब्जे की गंभीर शिकायत दर्ज कराकर इंसाफ की गुहार लगाई। Deoria RSS Worker Murder के बाद गरमाए माहौल को देखते हुए राजस्व विभाग ने 4 अक्टूबर को टीम गठित कर तत्काल मौके पर जमीन का सीमांकन शुरू कर दिया।
Deoria RSS Worker Murder के बाद प्रशासन की सख्त जांच
पैमाइश में खुला बड़ा सच
पुलिस बल और ग्रामीणों की मौजूदगी में राजस्व टीम ने गाटा संख्या 28, 29ग, 33 और 35 की गहन जांच शुरू की। अभिलेखों की पड़ताल में पता चला कि ये गाटे खाद के गड्ढे, बंजर, नवीन परती और पोखरी की जमीन के रूप में दर्ज हैं। सीमांकन के दौरान गाटा संख्या 35 की कुल 0.178 हेक्टेयर जमीन पोखरी के रूप में चिन्हित हुई।
कब्जे पर लहरा रही थी फसल
जांच में खुलासा हुआ कि पोखरी की 0.081 हेक्टेयर जमीन पर संजय (पुत्र श्याम नारायण) और वशिष्ठ नारायण (पुत्र भभिकन) ने अवैध रूप से धान की फसल बो रखी थी। Deoria RSS Worker Murder के मुख्य विवाद की कड़ियां इस सरकारी जमीन पर कब्जे से भी जुड़ती नजर आ रही थीं।
गरजा प्रशासन का बुलडोजर
आठ अक्टूबर को नायब तहसीलदार के नेतृत्व में राजस्व और पुलिस की संयुक्त टीम भारी बल के साथ मौके पर पहुंच गई। बुलडोजर ने अवैध रूप से बोई गई धान की फसल को रौंदकर सरकारी पोखरी की जमीन को पूरी तरह अतिक्रमण मुक्त करा दिया। इस सख्त कार्रवाई के बाद गांव के भूमाफियाओं और हमलावरों में हड़कंप मच गया है।






