रहस्यमयी डेडलाइन का खुला राज: Amit Shah Drugs Free India मिशन ने अचानक पूरे देश के सुरक्षा तंत्र में हलचल मचा दी है, क्योंकि गृह मंत्रालय ने देश से नशीले पदार्थों के खात्मे के लिए 31 दिसंबर 2029 की आखिरी तारीख तय कर दी है। गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह दो महीने पहले ही इस बेहद गोपनीय और सख्त रोडमैप को हरी झंडी दे चुके हैं। केंद्रीय सुरक्षा एजेंसियों, सभी राज्यों के डीजीपी और एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स (ANTF) के प्रमुखों के साथ मैराथन बैठकें पूरी हो चुकी हैं।
चुनावी हलचल या सोची-समझी रणनीति: दशहरे के मौके पर अमित शाह के पंजाब दौरे और रावण दहन के साथ चिट्टे के पुतले के दहन कार्यक्रम को लेकर सियासी पारा चढ़ चुका है। सत्तारूढ़ आम आदमी पार्टी इसे आगामी चुनाव से जुड़ा स्टंट बताकर सवाल उठा रही है कि दशकों पुरानी इस जटिल समस्या का समाधान महज तीन साल में कैसे संभव होगा। हालांकि, गृह मंत्रालय के अधिकारियों का तर्क है कि जैसे 31 मार्च 2026 तक देश को माओवाद से मुक्त करने के असंभव लगने वाले लक्ष्य को सच कर दिखाया गया, ठीक वैसे ही यह मिशन भी पूरा होगा।
Amit Shah Drugs Free India का सात साल पुराना सीक्रेट नेटवर्क
जड़ों पर प्रहार करने वाला NCORD ग्रिड: Amit Shah Drugs Free India की रणनीति कोई रातों-रात लिया गया फैसला नहीं है, बल्कि इसके पीछे पिछले सात सालों का व्यवस्थित होमवर्क काम कर रहा है। जिलों से लेकर राज्य और केंद्र स्तर तक नारकोटिक्स कोऑर्डिनेशन सेंटर (NCORD) का एक अभेद्य जाल बिछाया जा चुका है। केंद्रीय गृह मंत्री खुद इन बैठकों की बारीकी से निगरानी कर रहे हैं और देश भर में ड्रग्स तस्करी के प्रमुख रूटों की डिजिटल मैपिंग पूरी कर ली गई है।
अंतरराष्ट्रीय कार्टेल पर शिकंजा: तस्करों का नेशनल डेटाबेस तैयार करने के बाद अब विदेशी सरगनाओं को दबोचने के लिए वैश्विक एजेंसियों के साथ तालमेल बैठाया जा रहा है। इसी खुफिया समन्वय का नतीजा है कि यूएई और तुर्किये जैसे मुल्कों में पहचान छुपाकर बैठे बड़े ड्रग माफियाओं को ट्रैक कर भारत डिपोर्ट कराया जा रहा है। मुंद्रा पोर्ट से 21 हजार करोड़ की जब्ती और हाल ही में लक्षद्वीप के पास 3000 करोड़ के ड्रग्स के साथ पकड़े गए पाकिस्तानी तस्कर सुरक्षा एजेंसियों की भारी बढ़त को साबित करते हैं।






