Anubhav Chaudhary के ट्रैक पर कदम रखते ही 100 मीटर की स्पर्धा में सांसें थम गईं। टी-35 श्रेणी की इस ऐतिहासिक दौड़ में भारतीय धावक ने 12.72 सेकंड का अपना सर्वश्रेष्ठ समय निकालते हुए पोडियम पर जगह बनाई और भारत की झोली में कांस्य पदक डाल दिया।
कांटे की टक्कर में रचा नया कीर्तिमान। इस कड़े फाइनल में Anubhav Chaudhary ने रजत पदक विजेता इराक के इदरीस अल-जैदी (12.69 सेकंड) को कड़ी चुनौती दी और महज 0.03 सेकंड के अंतर से तीसरे स्थान पर रहे, जबकि ईरान के अलीरेजा जारे ने 12.32 सेकंड के साथ स्वर्ण जीता।
बचपन के संघर्ष और Anubhav Chaudhary की अदम्य इच्छाशक्ति
मुसीबतों को पछाड़कर बनाई जीत की राह। सेरेब्रल पाल्सी की गंभीर चुनौती से जूझते हुए Anubhav Chaudhary को जीवन में तब गहरा झटका लगा जब कोरोना काल में उनकी मां का निधन हो गया, जिसके बाद नाना विजयपाल सिंह ने उन्हें संबल दिया।
ग्राउंड से पोडियम तक का कठिन सफर। किसान पिता के बेटे Anubhav Chaudhary ने नोएडा में कैश काउंटर की नौकरी करने के बावजूद अभ्यास जारी रखा और अंततः कोच राहुल पंवार तथा कोच गौरव त्यागी के मार्गदर्शन में देश का मान बढ़ाया।






