सफर का बदलेगा पूरा भूगोल
Nagrota Surian Jawali Bridge का निर्माण कार्य जब से शुरू हुआ है, तब से कांगड़ा घाटी के हजारों यात्रियों के मन में एक बड़ा सवाल था कि आखिर कब खत्म होगा 25 किलोमीटर का लंबा और थका देने वाला फेरा। अब गज खड्ड के ऊपर 86.34 करोड़ रुपये की भारी लागत से तैयार हो रहा यह ढांचा हकीकत बनकर सामने खड़ा है। यह परियोजना नगरोटा सूरियां और जवाली के बीच के सफर को महज 16 किलोमीटर पर समेटने जा रही है।
खर्च और समय की सीधी कटौती
दूरी में 9 किलोमीटर की कमी आते ही दोनों तरफ के बाशिंदों की जेब पर पड़ने वाला पेट्रोल-डीजल का बोझ और रोजाना का कीमती वक्त सीधे तौर पर बचेगा। इस महत्वपूर्ण संपर्क मार्ग के जुड़ते ही क्षेत्र की सुस्त पड़ी आर्थिक और व्यापारिक गतिविधियों में अचानक भारी उछाल आने की पूरी पटकथा तैयार हो चुकी है।
Nagrota Surian Jawali Bridge पर मंत्री का बड़ा एक्शन
मौके पर पहुंचे कृषि मंत्री
Nagrota Surian Jawali Bridge का औचक निरीक्षण करने वीरवार को प्रदेश के कृषि एवं पशुपालन मंत्री प्रो. चंद्र कुमार खुद लोक निर्माण विभाग के आला अधिकारियों के साथ निर्माण स्थल पर पहुंचे। वहां चल रहे भारी ढांचागत कार्यों का बारीकी से जायजा लेते हुए उन्होंने विभागीय अधिकारियों और निर्माण कंपनी को दो-टूक शब्दों में काम की रफ्तार तेज करने की सख्त हिदायत दी।
गुणवत्ता पर कोई समझौता नहीं
तय समयसीमा का कड़ा निर्देश जारी करते हुए प्रो. चंद्र कुमार ने स्पष्ट किया कि पुल निर्माण में उच्च गुणवत्ता और तय सुरक्षा मानकों से जरा भी चूक बर्दाश्त नहीं की जाएगी। सरकार की पूरी योजना इस रणनीतिक पुल को तय समय पर पूरा कर जल्द से जल्द जनता के सुपुर्द करने की है।
पर्यटन और रोजगार का नया केंद्र
Nagrota Surian Jawali Bridge तैयार होने के बाद नगरोटा सूरियां और जवाली के दुर्गम इलाके पर्यटन के राष्ट्रीय मानचित्र पर नई ऊर्जा के साथ उभरेंगे। सुगम यातायात व्यवस्था से स्थानीय युवाओं के लिए पर्यटन, होमस्टे और स्वरोजगार के अनेक नए रास्ते खुलेंगे, जिससे हिमाचल सरकार का ग्रामीण आधारभूत ढांचे को सुदृढ़ करने का संकल्प पूरा होगा।





