रहस्यमयी रात की शुरुआत: Gajab Raat Review के जरिए सामने आया यह खौफनाक सच आपके रोंगटे खड़े कर देगा क्योंकि दिल्ली की अंधेरी सड़कों पर एक लड़की चलती गाड़ी से लहूलुहान होकर कूद जाती है। इस केस की कमान एक बेहद भ्रष्ट पुलिस इंस्पेक्टर अजय निर्वित यानी मनोज बाजपेयी के हाथों में आती है।
भ्रष्टाचार का खतरनाक खेल: रिश्वत के लालच में अंधा हो चुका यह पुलिसवाला पीड़ित लड़की को बचाने के बजाय खुद के निजी मुनाफे की गहरी साजिश बुनने लगता है। कहानी में मोड़ तब आता है जब एक संदिग्ध सीबीआई अफसर के साथ मिलकर अस्पताल में ही उस घायल लड़की को हमेशा के लिए खत्म करने की योजना बनाई जाती है।
Gajab Raat Review: सस्पेंस, डायरेक्शन और कलाकारों की अदाकारी
अदाकारी का असली जलवा: फिल्म में मनोज बाजपेयी ने हमेशा की तरह अपनी संजीदा और बेजोड़ एक्टिंग से इस लालची और भ्रष्ट किरदार में जान फूंक दी है। उनके साथ अक्षय ओबेरॉय, साकिब सलीम और हरियाणवी लहजे में राजीव गुप्ता ने बेहतरीन साथ निभाया है, जबकि दिव्या दत्ता और नुसरत भरूचा का रोल बेहद सीमित रखा गया है।
निर्देशन और तेज रफ्तार: निर्देशक रितेश शाह ने 2 घंटे 3 मिनट की इस थ्रिलर को केवल एक रात की घटनाओं के इर्द-गिर्द बहुत ही सस्पेंस भरे अंदाज में बांधकर रखा है। स्क्रीनप्ले में कई परतों वाले राजनीतिक भ्रष्टाचार, अंडरवर्ल्ड और क्राइम के गठजोड़ को बिना धीमा पड़े लगातार पेश किया गया है।
कहानी की कमजोर कड़ियां: इस क्राइम थ्रिलर का ओरिजिनल टाइटल पहले ‘घूसखोर पंडत’ रखा गया था जिसे विवादों के चलते बाद में बदलकर ‘गजब रात’ कर दिया गया। पटकथा की सबसे बड़ी खामी यह है कि एक बेहद लालची पुलिस अफसर का अचानक एक ही रात में हृदय परिवर्तन बिना किसी पुख्ता वजह के दिखा दिया जाता है।
अंतिम फैसला: बेहतरीन अदाकारी और अंधेरी रात के रोमांचक ट्विस्ट्स के लिए Gajab Raat Review देखने के बाद इसे एक बार देखना जरूर बनता है। अगर आप डार्क और ग्रिपिंग मर्डर मिस्ट्री के शौकीन हैं तो नेटफ्लिक्स की यह पेशकश आपके वीकेंड का रोमांच दोगुना कर देगी।







