Kishore Kumar Last Song रिकॉर्ड होने के ठीक आठ घंटे बाद सिनेमा जगत में एक ऐसा सन्नाटा पसर गया जिसकी कल्पना किसी ने नहीं की थी। 13 अक्टूबर 1987 को दिल का दौरा पड़ने से हर दिल अजीज गायक किशोर दा ने इस फानी दुनिया को हमेशा के लिए अलविदा कह दिया था।
महबूब स्टूडियो का वह आखिरी दिन: 12 अक्टूबर 1987 को मुंबई के महबूब स्टूडियो में किशोर कुमार संगीतकार बप्पी लहिरी के साथ मौजूद थे। फिल्म ‘वक्त की आवाज’ के लिए मिथुन चक्रवर्ती और श्रीदेवी पर फिल्माए जाने वाले ट्रैक ‘गुरू गुरू आ जाओ’ पर काम चल रहा था।
हंसी-मजाक के बीच Kishore Kumar Last Song की रिकॉर्डिंग: स्टूडियो में मौजूद लोगों को बिल्कुल भनक नहीं थी कि यह किशोर दा की अंतिम रिकॉर्डिंग साबित होगी। वे हर बार की तरह अपने चिरपरिचित अंदाज में सभी को हंसा रहे थे और पूरे माहौल को जिंदादिल बनाए हुए थे।
बप्पी लहिरी का दर्दनाक संस्मरण: बप्पी दा ने बताया था कि शाम छह बजे रिकॉर्डिंग खत्म कर वे स्टूडियो से निकले थे। आधी रात को दो बजे फोन की घंटी बजी और खबर आई कि जिन्हें वे मामा कहते थे, वे अब नहीं रहे।
अमर आवाज की विरासत: Kishore Kumar Last Song उनकी मौत के बाद रिलीज हुआ और चार्टबस्टर साबित हुआ। 1940 से 1987 तक अपने 58 साल के सफर में 16 हजार से अधिक गीतों को आवाज देने वाले इस फनकार की यादें आज भी जिंदा हैं।







