सियासी गलियारों में बड़ा भूचाल: Modi Cabinet Reshuffle की उल्टी गिनती शुरू होते ही लुटियंस दिल्ली के राजनीतिक गलियारों में भारी खलबली मच गई है। पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी और सामाजिक न्याय व अधिकारिता राज्यमंत्री बीएल वर्मा को आगामी राज्यसभा चुनाव का टिकट न मिलने के बाद यह लगभग तय हो गया है कि दोनों दिग्गज नेताओं की केंद्रीय मंत्रिमंडल से सम्मानजनक विदाई होने जा रही है।
कार्यकाल की अंतिम समयसीमा: दोनों कद्दावर नेताओं का राज्यसभा कार्यकाल 25 नवंबर को पूरी तरह समाप्त हो रहा है, जिसके बाद नियमानुसार उनका कैबिनेट में बने रहना असंभव होगा। इन दोनों के हटते ही पिछले महज चार महीनों के भीतर सरकार से बाहर होने वाले कुल मंत्रियों की संख्या बढ़कर पांच तक पहुंच जाएगी।
विपक्ष का दबाव और रणनीतिक बदलाव: इससे पहले जून-जुलाई की शुरुआत में रवनीत सिंह बिट्टू और जॉर्ज कुरियन का कार्यकाल समाप्त होने के चलते उन्हें मंत्री पद से इस्तीफा देना पड़ा था। वहीं दूसरी तरफ, राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर पर नीट पेपर लीक विवाद को लेकर हुए भारी विरोध-प्रदर्शनों के बाद धर्मेंद्र प्रधान को भी मंत्रिमंडल से बाहर का रास्ता देखना पड़ा था।
गठबंधन की पेच और नए समीकरण: केंद्रीय वित्त राज्यमंत्री पंकज चौधरी को हाल ही में उत्तर प्रदेश भाजपा का नया प्रदेश अध्यक्ष नियुक्त किए जाने के बाद से ही बदलाव की अटकलें जोरों पर थीं। शिरोमणि अकाली दल के साथ संभावित चुनावी गठबंधन और सीट बंटवारे पर चल रही बातचीत के चलते इस विस्तार को कुछ समय के लिए रोककर रखा गया था।
Modi Cabinet Reshuffle: 2029 के रण और युवा चेहरों पर दांव
युवा और महिला शक्ति को प्राथमिकता: सूत्रों के अनुसार, मोदी 3.0 कार्यकाल का यह पहला और संभवतः अंतिम बड़ा फेरबदल साबित होगा, जिसके दम पर केंद्र सरकार सीधे 2029 के लोकसभा चुनाव के मैदान में उतरेगी। इस बड़े रणनीतिक फेरबदल में पार्टी संगठन से जुड़े निष्ठावान कार्यकर्ताओं, ऊर्जावान युवाओं और महिला चेहरों को भारी तरजीह दिए जाने की पूरी तैयारी है।
अंतिम मुहर का इंतजार: महिला आरक्षण लागू होने से पहले आधी आबादी की भागीदारी बढ़ाने और क्षेत्रीय संतुलन साधने के लिए नए चेहरों की सूची लगभग तैयार कर ली गई है। गठबंधन की औपचारिक घोषणा होते ही प्रधानमंत्री किसी भी वक्त अपने नए मंत्रिपरिषद के नामों का ऐलान कर सबको चौंका सकते हैं।






