रहस्यों से भरा एक कालजयी तराना
Rind Posh Maal की धुन जब भी कानों में गूंजती है, तो रूह में एक अजीब सी हलचल और अनकहा सन्नाटा तैर जाता है। बॉलीवुड की चर्चित फिल्म ‘मिशन कश्मीर’ का यह संगीत ट्रैक आज भी करोड़ों श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर देता है। जिसे दर्शक सिर्फ एक पार्टी सॉन्ग समझते रहे, उसके पीछे सदियों पुराना दर्द छिपा है।
Rind Posh Maal का कश्मीरी साहित्य से गहरा नाता
Rind Posh Maal वस्तुतः कोई फिल्मी ट्रैक नहीं, बल्कि 19वीं सदी के महान सूफी शायर रसूल मीर द्वारा रची गई एक अमर कश्मीरी रचना है। साहित्य अकादमी द्वारा 1990 में जी.आर. मलिक की लिखित पुस्तक में इस कविता और रसूल मीर के प्रेम का प्रमाण मिलता है। माना जाता है कि शायर ने यह नज़्म ‘कोंग’ नामक महिला के विरह में लिखी थी।
गीत के लफ़्ज़ों में छुपा रूहानी फ़लसफ़ा
Rind Posh Maal में ‘रिन्द’ का अर्थ मस्तमौला, ‘पोश’ का मतलब फूल और ‘माल’ का आशय फूलों जैसी नाज़ुक स्त्री से है। अगली पंक्ति ‘गिन्दने द्राय लो लो’ का अर्थ बाहर खेलने या विचरण करने से है। वसंत के आगमन और प्रेमिका की जुदाई के इस दर्द भरे सार को शंकर-एहसान-लॉय ने संगीतबद्ध किया और समीर ने हिंदी बोलों में ढाला।
शंकर महादेवन के करियर का टर्निंग प्वाइंट
Rind Posh Maal ने मशहूर गायक शंकर महादेवन के लिए हिंदी सिनेमा के बड़े दरवाज़े हमेशा के लिए खोल दिए। विधु विनोद चोपड़ा की इस फिल्म में आतंकवाद और बदले की पृष्ठभूमि पर अल्ताफ (ऋतिक रोशन) की त्रासदी को दर्शाया गया था। इस गीत की पूरी और अधिकृत पंक्तियां जानने के लिए आप गूगल सर्च पर इसके मूल कश्मीरी बोल देख सकते हैं।







