चौंकाने वाला बड़ा खुलासा: NEET Discrepancy MP High Court का यह मामला एक ऐसे गंभीर मोड़ पर पहुंच चुका है, जिसने नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) की कार्यप्रणाली पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की इंदौर पीठ में एक छात्र ने याचिका दायर कर 241 अंकों की विसंगति का सनसनीखेज आरोप लगाया है।
अदालत का कड़ा रुख: NEET Discrepancy MP High Court में दायर इस याचिका पर सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति सुबोध अभ्यंकर और न्यायमूर्ति आलोक अवस्थी की युगल पीठ ने NTA से तुरंत जवाब तलब किया है। अदालत ने एजेंसी को स्थिति स्पष्ट करने के निर्देश दिए हैं ताकि छात्र का भविष्य अधर में न लटके।
NEET Discrepancy MP High Court: ओएमआर शीट और अंक तालिका में भारी अंतर
305 से सीधे 64 अंक: झाबुआ जिले के पीड़ित छात्र लोकेंद्र सिंह खड़िया के अनुसार, जब उन्होंने 14 जुलाई को अपनी ओएमआर शीट देखी, तो शुरुआत में उनके सभी उत्तर खाली दिख रहे थे। दोबारा लॉगिन करने पर जो ओएमआर मिली, उसकी आधिकारिक आंसर-की मिलाने पर उनके भौतिकी में 104, रसायन विज्ञान में 125 और जीव विज्ञान में 76 अंक यानी कुल 305 अंक बन रहे थे, लेकिन 16 जुलाई 2026 के अंतिम परिणाम में उन्हें सिर्फ 64 अंक थमा दिए गए।
ओएमआर प्रोसेसिंग में तकनीकी खामी: छात्र का स्पष्ट आरोप है कि यह पूरी तरह से ओएमआर डेटा प्रोसेसिंग, मूल्यांकन प्रणाली और परिणाम तैयार करने की प्रक्रिया में हुई गंभीर तकनीकी गड़बड़ी है। उन्होंने इस संबंध में NTA को ईमेल द्वारा शिकायत भी भेजी थी, परंतु कोई समाधान न मिलने पर अदालत का दरवाजा खटखटाया।
एनटीए की वैधानिक स्थिति पर हमला: NEET Discrepancy MP High Court केस में केवल अंकों की विसंगति को ही चुनौती नहीं दी गई है, बल्कि NTA के कानूनी ढांचे पर भी सवाल उठाया गया है। याचिका में कहा गया है कि NTA संसद द्वारा निर्मित कोई वैधानिक संस्था नहीं, बल्कि सोसाइटी रजिस्ट्रेशन एक्ट 1860 के तहत पंजीकृत एक सोसाइटी मात्र है।
निष्पक्ष सत्यापन की मांग: याचिकाकर्ता ने अदालत में स्पष्ट किया है कि वे उत्तरों के पुनर्मूल्यांकन की मांग नहीं कर रहे हैं, बल्कि NTA के आधिकारिक रिकॉर्ड में मौजूद NEET Discrepancy MP High Court से जुड़ी गड़बड़ियों का स्वतंत्र और निष्पक्ष सत्यापन चाहते हैं।






