वडनगर से काशी तक का रहस्यमयी सफर: Seva Sankalp Yatra अचानक तब देश भर में चर्चा का केंद्र बन गई, जब खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस अनूठे सफर से जुड़े यात्रियों के सामने वर्चुअल संवाद के लिए आ खड़े हुए। गुजरात के वडनगर से शुरू होकर उत्तर प्रदेश के वाराणसी तक जाने वाले इस कारवां के यात्रियों के सेवा भाव और असीम ऊर्जा की पीएम ने खुलकर प्रशंसा की।
जन्मभूमि और कर्मभूमि का आध्यात्मिक मेल: प्रधानमंत्री ने इस संवाद में भावुक होते हुए कहा कि एक तरफ वडनगर उनकी जन्मस्थली है, तो दूसरी तरफ काशी उनकी कर्मभूमि बनकर उभरी है। दोनों ही शहरों का गौरवशाली इतिहास एक हजार वर्ष से भी अधिक पुराना है, जहां एक ओर हटकेश्वर महादेव का आशीर्वाद मिलता है, वहीं दूसरी ओर काशी विश्वनाथ की कृपा बरसती है।
यात्रियों के संघर्ष और सेवा की मिसाल: इस लंबी दूरी की यात्रा के दौरान Seva Sankalp Yatra में शामिल युवाओं ने रास्ते में पड़ने वाले कई क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर जनकल्याणकारी कार्य किए। पीएम मोदी ने अपने पुराने संगठनात्मक अनुभवों को साझा करते हुए बताया कि बदलते मौसम और कठिन रास्तों के बीच सेवा का ऐसा संकल्प बनाए रखना बेहद दुर्लभ और प्रेरक है।
Seva Sankalp Yatra और विकसित भारत का निर्माण
राजनीति से परे राष्ट्र निर्माण का संकल्प: पीएम मोदी ने स्पष्ट किया कि राजनीति और चुनाव अपनी जगह हैं, मगर राष्ट्र निर्माण का दायित्व सबसे ऊपर है। उन्होंने रेखांकित किया कि आयुष्मान भारत जैसी जीवनदायिनी योजनाओं की उत्पत्ति भी इसी निष्काम सेवा भावना की जमीन पर हुई है।
2047 के लक्ष्य में युवा शक्ति की भूमिका: संबोधन के अंत में पीएम मोदी ने दोहराया कि वर्ष 2047 तक ‘विकसित भारत’ के संकल्प को सिद्ध करने की असली ताकत देश के युवाओं के हाथों में ही केंद्रित है। उन्होंने कहा कि आज चल रही यह Seva Sankalp Yatra केवल एक यात्रा नहीं, बल्कि भविष्य के समृद्ध और आत्मनिर्भर भारत की मजबूत नींव का प्रतीक है।






