सोनिया गांधी का बड़ा खुलासा:Sonia Gandhi on Emergency पर अपनी नई किताब ‘Belonging: A Journey of Love’ के रिलीज से ठीक पहले एक ऐसा सनसनीखेज सच सामने लाई हैं, जिसने देश के सियासी गलियारों में हलचल पैदा कर दी है। 1975 के दौर में देश के सबसे ताकतवर राजनीतिक परिवार के भीतर क्या चल रहा था, इसका पर्दाफाश उन्होंने बेहद बेबाकी से किया है।
संजय गांधी और परिवार का टकराव:Sonia Gandhi on Emergency के दौरान के हालात को याद करते हुए बताती हैं कि यदि उस समय संजय गांधी को नियंत्रण में रखा जाता, तो शायद देश को इतने बड़े नुकसान का सामना नहीं करना पड़ता। एक डिनर के दौरान संजय ने विपक्ष को रोकने के लिए आपातकाल लगाने का दबाव बनाया था, जिसके बाद परिवार में भारी तनाव पैदा हो गया था।
आपातकाल और इंदिरा गांधी का नजरिया: Sonia Gandhi on Emergency
इंदिरा गांधी पर वरिष्ठ नेताओं का दबाव:Sonia Gandhi on Emergency के संदर्भ में स्पष्ट करती हैं कि हर ज्यादती का एकमात्र कसूरवार सिर्फ संजय गांधी को ठहराना बिल्कुल भी सही नहीं है। उस वक्त इंदिरा गांधी के आसपास मौजूद कई वरिष्ठ सहयोगियों की तरफ से भी कड़े फैसलों को लेकर लगातार भारी दबाव डाला जा रहा था।
राजीव गांधी की अलग सोच:सोनिया गांधी के अनुसार, उस दौर में राजीव गांधी का नजरिया बिल्कुल अलग था और वे आम जनता की शिकायतों को सीधे अपनी मां इंदिरा गांधी तक पहुंचाते थे। हालात की गंभीरता को देखते हुए बाद में इंदिरा गांधी ने खुद स्थिति को संभाला और मार्च 1977 में चुनाव कराने का फैसला लिया।
गलतियों पर अफसोस और माफी:Sonia Gandhi on Emergency को लेकर यह भी याद दिलाती हैं कि इंदिरा गांधी ने बाद में आपातकाल के दौरान हुई ज्यादतियों पर सार्वजनिक तौर पर अफसोस जताया था और माफी भी मांगी थी। लोकतांत्रिक अधिकारों के हनन के बावजूद उन्होंने अंततः लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं के जरिए ही सत्ता की दिशा जनता के हाथों में सौंपी थी।







