गहराता सियासी सस्पेंस और सख्त चेतावनी: PM Modi in Banaskantha की धरती पर जैसे ही कदम रखे, पूरे देश का सियासी तापमान अचानक चढ़ गया। गुजरात के इस विशाल मंच से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विरोधी खेमे की उस रणनीति पर कड़ा प्रहार किया, जो विकास की रफ्तार को पटरी से उतारना चाहती है। उन्होंने दो टूक लहजे में साफ कर दिया कि विरोधियों को देश की तरक्की रास नहीं आ रही और वे संकटों में अपनी खुशियां ढूंढते हैं।
विरोधियों की साजिशों का पर्दाफाश: प्रधानमंत्री ने जनसभा को संबोधित करते हुए कहा कि विपक्षी नेता केवल मोदी को बदनाम करने की नीयत से दिन-रात झूठे नैरेटिव गढ़ रहे हैं। उन्होंने कहा कि जब भी भारत के सामने कोई वैश्विक या आंतरिक चुनौती आती है, तो विरोधी जश्न मनाने लगते हैं। पीएम ने स्पष्ट किया कि विपक्ष की यह नफरत असल में राष्ट्र के उत्थान और किसानों के स्वाभिमान के खिलाफ है।
वैश्विक खाद संकट और भारत की ढाल: मिडिल ईस्ट में चल रहे युद्ध और वैश्विक फर्टिलाइजर की आसमान छूती कीमतों का जिक्र करते हुए उन्होंने एक बड़ा रहस्य उजागर किया। दुनिया भर में यूरिया और आवश्यक खादों के दाम रिकॉर्ड स्तर तक पहुंचे, लेकिन केंद्र सरकार ने इसका बोझ भारतीय किसानों की जेब पर बिल्कुल नहीं आने दिया। सरकार ने भारी सब्सिडी देकर अन्नदाताओं को इस अंतरराष्ट्रीय आर्थिक झटके से पूरी तरह सुरक्षित रखा।
MSP का ऐतिहासिक सच उजागर: पिछली सरकारों के झूठे वादों की पोल खोलते हुए पीएम ने बताया कि न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) के नाम पर दशकों तक किसानों को केवल छला गया। मौजूदा सरकार ने अपने कार्यकाल में गेहूं और धान के किसानों के बैंक खातों में MSP के जरिए 24 लाख करोड़ रुपये की भारी-भरकम राशि सीधे स्थानांतरित की है। यह आंकड़ा बताता है कि नीयत साफ हो तो बदलाव कैसे जमीन पर उतरता है।
खेती में आधुनिक तकनीक की क्रांति: भारतीय कृषि को आधुनिक युग से जोड़ने के अभियान में अब तक 26 करोड़ से अधिक ‘सॉइल हेल्थ कार्ड’ वितरित किए जा चुके हैं। पहले किसान असमंजस में रहते थे कि कौन सी खाद कितनी मात्रा में डालनी है, लेकिन विज्ञान और तकनीक ने इस अनिश्चितता को जड़ से खत्म कर दिया। इस नवाचार ने देश के परंपरागत कृषि ढांचे को पूरी तरह वैज्ञानिक और लाभप्रद बना दिया है।
पशुपालन और बायो-एनर्जी का नया मॉडल: राष्ट्रीय गोकुल मिशन के तहत बनासकांठा में आधुनिक अनुसंधान केंद्र और दो बड़े बायो-सीएनजी प्लांट की नींव रखी गई है। इसका मुख्य उद्देश्य पशुओं के स्वास्थ्य में सुधार, दुग्ध उत्पादन में वृद्धि और गोबर के व्यावसायिक उपयोग से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती देना है। पशुपालन अब केवल जीवन यापन का साधन नहीं, बल्कि गांवों को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने का एक मजबूत जरिया बन चुका है।
छोटे किसानों को सीधा आर्थिक संबल: इस ऐतिहासिक आयोजन में पीएम किसान सम्मान निधि की 24वीं किस्त जारी की गई, जिसके तहत योजना में अब तक 4.5 लाख करोड़ रुपये छोटे किसानों के खातों में भेजे जा चुके हैं। देश के 85 प्रतिशत से अधिक छोटे किसान दशकों तक व्यवस्था की उपेक्षा झेलते रहे, लेकिन आज उन्हें बिना किसी बिचौलिए के सीधी आर्थिक सहायता मिल रही है।






