चौंकाने वाला जनादेश और सन्नाटा: Bihar MLC Elections Result 2026 के सामने आते ही सत्ता के गलियारों में अचानक वो राजनीतिक तूफान उठ खड़ा हुआ जिसकी किसी को उम्मीद नहीं थी। विधान परिषद की शिक्षक और स्नातक सीटों के परिणामों ने एनडीए खेमे के भीतर गहरी आंतरिक दरार और अविश्वास को सबके सामने उजागर कर दिया है।
जदयू का किला ढहा: एनडीए के भीतर सबसे बड़ा झटका तब लगा जब जनता दल यूनाइटेड अपने खाते की चार में से तीन अहम सीटों पर अप्रत्याशित रूप से चुनाव हार गई। इस भारी शिकस्त के तुरंत बाद तनाव उस वक्त और भड़क उठा जब दो विजेता निर्दलीय प्रत्याशियों को भाजपा में शामिल कराने की कोशिशें तेज कर दी गईं।
निर्दलीयों की एंट्री पर घमासान: तिरहुत स्नातक सीट से जीते वंशीधर ब्रजवासी और सारण शिक्षक सीट से जीते राहुल राज को भाजपा में लाने की कवायद शुरू हुई। हालांकि कानूनी अड़चनों के कारण वे औपचारिक रूप से पार्टी में शामिल नहीं हो सके, लेकिन अब वे भाजपा को केवल बाहर से समर्थन देने का दावा कर रहे हैं।
Subheading: Bihar MLC Elections Result 2026 के बाद रूडी के बयान ने छेड़ा नया विवाद
रूडी का सियासी धमाका: इसी बीच भाजपा के वरिष्ठ नेता और सांसद राजीव प्रताप रूडी के एक बेहद सनसनीखेज बयान ने गठबंधन की राजनीति में आग में घी डालने का काम कर दिया। उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा कि आज भाजपा के भीतर किसी राजपूत नेता की ऐसी हैसियत नहीं रह गई है जिसके कहने पर कोई उम्मीदवार मैदान छोड़ दे या जनता वोट दे।
आनंद पुष्कर के गंभीर आरोप: रूडी का यह तीखा पलटवार सारण शिक्षक सीट से हारे जदयू प्रत्याशी आनंद पुष्कर के आरोपों के जवाब में आया है। पुष्कर का सीधा आरोप था कि राजीव प्रताप रूडी, जनार्दन सिंह सिग्रीवाल और राधामोहन सिंह जैसे दिग्गज भाजपा सांसदों ने गठबंधन धर्म का पालन न करते हुए बागी प्रत्याशी को मौन समर्थन दिया।
अभिमन्यु जैसा चक्रव्यूह: आरोप इसलिए भी संवेदनशील हैं क्योंकि आनंद पुष्कर को हराने वाले निर्दलीय राहुल राज भाजपा के ही पूर्व नेता थे जिन्हें बगावत के चलते छह साल के लिए निकाला गया था। वहीं दूसरी तरफ तिरहुत स्नातक सीट से हारे जदयू के अभिषेक झा ने भी दर्द बयां करते हुए कहा कि उनके खिलाफ एनडीए के भीतर ही चक्रव्यूह रचा गया था।
Bihar MLC Elections Result 2026 पर समीक्षा की तैयारी: प्रदेश जदयू अध्यक्ष उमेश सिंह कुशवाहा ने निष्कासित बागी नेताओं को भाजपा द्वारा संरक्षण दिए जाने पर तीखा विरोध दर्ज कराया है। जदयू ने चुनावी नतीजों और भितरघात की गहन पड़ताल के लिए 5 नवंबर को पार्टी की एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक बुलाई है।
सहयोगियों का रुख: इस पूरे सियासी ड्रामे के बीच लोजपा (रामविलास) के मुखिया चिराग पासवान और हम (HAM) प्रमुख संतोष सुमन ने निर्दलियों द्वारा समर्थन दिए जाने पर कोई आपत्ति नहीं जताई। उन्होंने साफ कहा कि कानूनी पहलू अपनी जगह है, लेकिन किसी भी जीते हुए जनप्रतिनिधि का समर्थन लेना राजनीति में अस्वाभाविक नहीं है।






