कैप्टन स्मित मच्छर: आसमान में मौत से जंग और जांबाजी की अनकही कहानी
मौत का वो खौफनाक मंजर: कैप्टन स्मित मच्छर ने जब दुबई से तेल अवीव जा रही फ्लाईदुबई की फ्लाइट का कॉकपिट संभाला था, तब किसी ने नहीं सोचा था कि बादलों के बीच खूनी साजिश इंतजार कर रही है। अचानक को-पायलट ने उन पर जानलेवा हमला बोल दिया और विमान को क्रैश करने की सनक में धकेल दिया।
अदम्य साहस और करिश्मा: कैप्टन स्मित मच्छर गंभीर रूप से लहुलूहान होने के बावजूद विचलित नहीं हुए और 174 बेकसूर यात्रियों और क्रू मेंबर्स की ढाल बन गए। सिर और सीने पर ताबड़तोड़ वार सहते हुए उन्होंने महज 30 सेकंड में 14,000 फीट नीचे गिर चुके विमान का कंट्रोल वापस खींच लिया।
अचेत होने से पहले का फैसला: हाईजैक कोड 7500 ट्रांसमिट करने के बाद जब शरीर जवाब दे रहा था, तब भी उन्होंने होश खोने से पहले कॉकपिट का दरवाजा अनलॉक कर दिया ताकि केबिन क्रू अंदर घुसकर हमलावर को दबोच सके। 39 वर्षीय इस पायलट के लिए ऐसा साहसिक फैसला लेना कोई इत्तेफाक नहीं था, बल्कि यह उनके जीवनभर के शांत और संयमित स्वभाव का नतीजा था।
बचपन के दोस्त और पड़ोसी: मुंबई के तिलक नगर स्थित स्वास्तिक हाइट्स में रहने वाले लोग उन्हें एक जिंदादिल और मददगार इंसान के तौर पर याद करते हैं। पड़ोसी लक्ष्मीकांत जोशी बताते हैं कि पिता की बाईपास सर्जरी की खबर मिलते ही वे सीधे अस्पताल पहुंचे और पूरे इलाज के दौरान परिवार का संबल बने रहे।
सादगी और जमीन से जुड़ाव: सोसायटी में स्वतंत्रता दिवस पर झंडा फहराने की रस्सी में सही गांठ बांधने से लेकर दोस्तों की छोटी-छोटी जरूरतों का ख्याल रखना उनकी फितरत में शुमार रहा है। उनके फ्लाइंग स्कूल के साथी कैप्टन धराव गोसालिय कहते हैं कि ग्राउंड स्टाफ से लेकर केबिन क्रू तक, वे सभी से हमेशा अगाध सम्मान और बराबरी से मिलते हैं।
हवाई सफर की मजबूत बुनियाद: 2003 में एम डी भाटिया स्कूल से 10वीं पास करने वाले स्मित को कभी दिखावा पसंद नहीं था, जैसा कि उनके सहपाठी भाविन जेठवा बताते हैं। 2000 के दशक के आखिर में न्यूजीलैंड के मेनलैंड एविएशन कॉलेज में ट्रेनिंग के दौरान एयर नेविगेशन और टेक्निकल विषयों में वे हर साथी की सबसे बड़ी मदद बनते थे।
स्पाइसजेट से फ्लाईदुबई का सफर: भारत में स्पाइसजेट को सेवाएं देने के बाद वर्ष 2022 में वे दुबई चले गए, जहां फ्लाईदुबई में बोइंग 737 के कैप्टन और लाइन ट्रेनर के तौर पर जिम्मेदारी संभाली। आज अस्पताल में जिंदगी की जंग जीत रहे इस जांबाज के जल्द स्वस्थ होने की दुआएं पूरा देश और उनके दोस्त एक साथ मांग रहे हैं।








