Indian Railways Pharmacist Eligibility Changes के आधिकारिक ऐलान ने देश के हजारों डिप्लोमा इन फार्मेसी (डी.फार्मा) पास बेरोजगार युवाओं के भविष्य और उनके सपनों को एक झटके में पूरी तरह से हिलाकर रख दिया है। रेलवे बोर्ड द्वारा फार्मासिस्ट ग्रेड-तीन (लेवल-पांच) के पदों पर होने वाली सीधी भर्ती के लिए आवश्यक न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता के नियमों को पूरी तरह बदल दिया गया है।
अब केवल डिग्री धारक ही होंगे पात्र: रेलवे बोर्ड के नए दिशानिर्देशों के अनुसार, अब रेलवे अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों में फार्मासिस्ट की सरकारी नौकरी पाने के लिए डी.फार्मा करने वाले उम्मीदवार पूरी तरह से अपात्र घोषित कर दिए गए हैं। अब इस पद पर केवल वही उम्मीदवार आवेदन कर सकेंगे, जिनके पास किसी मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय या संस्थान से एलोपैथिक में ‘बैचलर डिग्री इन फार्मेसी’ यानी बी.फार्मा की डिग्री होगी।
फार्मा.डी डिग्रीधारकों को भी मिला मौका: नए संशोधित नियमों के तहत बी.फार्मा डिग्री के साथ-साथ उम्मीदवार का फार्मेसी एक्ट, 1948 के अधीन एक पंजीकृत फार्मासिस्ट के रूप में रजिस्टर्ड होना बेहद आवश्यक है। इसके अतिरिक्त, जिन अभ्यर्थियों ने ‘डॉक्टर ऑफ फार्मेसी’ यानी फार्मा.डी की उच्च डिग्री हासिल की है, उन्हें भी इस पद के लिए पूर्ण रूप से योग्य माना गया है।
पुराने नियम और बदलाव की मुख्य वजह: पहले इस भर्ती के लिए विज्ञान विषय के साथ 12वीं पास होने और सिर्फ दो साल का डिप्लोमा (डी.फार्मा) करने वाले अभ्यर्थियों को मौका मिल जाता था। रेलवे बोर्ड ने चिकित्सा सेवाओं की गुणवत्ता को और अधिक बेहतर, आधुनिक तथा विश्वस्तरीय बनाने के उद्देश्य से ही यह बड़ा फैसला लिया है, जिसके लिए 10 जुलाई को आधिकारिक आदेश जारी किया गया था।
भविष्य की भर्तियों पर लागू होगा नियम: रेलवे बोर्ड के निदेशक (स्थापना) यूके तिवारी ने इस पूरे मामले को स्पष्ट करते हुए कहा है कि Indian Railways Pharmacist Eligibility Changes का यह नया नियम केवल भविष्य में आने वाले नए भर्ती विज्ञापनों और ओपन मार्केट भर्तियों पर ही प्रभावी होगा। जिन पुरानी भर्तियों के विज्ञापन पहले जारी हो चुके हैं, उनकी चयन प्रक्रिया पुराने नियमों से ही पूरी होगी।
हजारों डी.फार्मा छात्रों को लगा झटका: इस बड़े बदलाव के बाद देश भर के विभिन्न राज्यों से रेलवे में फार्मासिस्ट बनने की तैयारी कर रहे हजारों डिप्लोमा धारक छात्रों में मायूसी छा गई है। वहीं दूसरी तरफ, इस फैसले से देश के बी.फार्मा और फार्मा.डी डिग्री धारक युवाओं के लिए रेलवे के चिकित्सा विभाग में रोजगार पाने के बेहतरीन अवसर काफी ज्यादा बढ़ गए हैं।






