रहस्यमयी बदलाव की शुरुआत:
सरकारी योजनाओं की सफलता अब सरकारी फाइलों के बंद पन्नों में दबकर नहीं रहेगी, बल्कि मोबाइल स्क्रीन पर रहस्य खोलते वीडियो क्लिप्स के रूप में सामने आएगी। उत्तर प्रदेश शासन ने एक अप्रत्याशित कदम उठाते हुए ‘सेवा की कहानी-डिजिटल व रील अभियान’ की घोषणा कर दी है, जिससे पूरे प्रशासनिक तंत्र में खलबली मच गई है।
उद्योग केंद्रों को मिला सख्त फरमान:
गाजियाबाद सहित प्रदेश के सभी जिला उद्योग एवं उद्यम प्रोत्साहन केंद्रों को यह कड़ा आदेश दिया गया है कि 17 सितंबर से 17 अक्टूबर तक हर हाल में डिजिटल प्रगति दिखानी होगी। अब तक केवल कागजी और वित्तीय आंकड़े देकर बचने वाले अधिकारियों को स्पष्ट चेतावनी दी गई है कि डिजिटल मौजूदगी दर्ज किए बिना काम नहीं चलेगा।
सरकारी योजनाओं की सफलता अब सोशल मीडिया रील्स पर
रिपोर्टिंग के बदले कड़े नियम:
सरकारी योजनाओं की सफलता को दर्शाने के लिए जिलों को लाभार्थियों, जनप्रतिनिधियों, विभाग और क्षेत्रीय सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स की रील्स का अलग-अलग ब्योरा भेजना अनिवार्य किया गया है। इतना ही नहीं, दिन, महीना और वर्ष के साथ अधिकतम पांच तस्वीरें 500 KB से कम आकार में आधिकारिक पोर्टल पर अपलोड करनी होंगी।
जिलों के बीच कांटे की टक्कर:
मुख्यमंत्री युवा स्वरोजगार योजना, युवा उद्यमी विकास अभियान, ODOP और विश्वकर्मा श्रम सम्मान योजना के कारीगरों की रील्स बनाकर सीधे जनता तक पहुंचाई जाएंगी। अभियान के अंत में शासन उन जिलों की सीधी रैंकिंग जारी करेगा, जहां से यह तय होगा कि किस जिले ने सरकारी योजनाओं की सफलता को सबसे प्रभावशाली ढंग से जनता के सामने रखा।





