रहस्यमयी कलम का वो फनकार जिसने खामोशी को आवाज दी
Raja Mehdi Ali Khan एक ऐसा नाम थे, जिनकी कलम से निकले अल्फाज जब सुरों में ढले, तो सदियों के लिए अमर हो गए। साल 1947 में जब फिल्म ‘दो भाई’ पर्दे पर आई, तो इसके गीत ‘मेरा सुंदर सपना बीत गया’ ने पूरी इंडस्ट्री में तहलका मचा दिया। इस एक नग्मे ने जहां गायिका गीता दत्त को रातों-रात शोहरत की बुलंदियों पर पहुंचाया, वहीं परदे के पीछे मौजूद इस लेखक की तकदीर भी हमेशा के लिए बदल दी।
एक्टिंग और डायलॉग राइटिंग से हुई थी शुरुआत
Raja Mehdi Ali Khan ने गीतकार के तौर पर छाने से पहले कई फिल्मों में अभिनय और संवाद लेखन का काम संभाला था। ऑल इंडिया रेडियो में सेवाएं देने के साथ-साथ वह मशहूर अफसानानिगार सआदत हसन मंटो के बेहद करीबी दोस्तों में गिने जाते थे। फिल्म ‘दो भाई’ में जब उन्हें मौका मिला, तो उन्होंने ‘मेरा सुंदर सपना बीत गया’ और ‘याद करोगे’ लिखकर यह साबित कर दिया कि उनकी शायरी में रूह को छू लेने वाला जादू है।
विभाजन की त्रासदी और वतन से बेपनाह मोहब्बत
जब सरहदें खिंच गईं पर वतन नहीं बदला
23 सितंबर 1919 को ब्रिटिश इंडिया के वजीराबाद (अब पाकिस्तान) में जन्मे Raja Mehdi Ali Khan का करियर जब उड़ान भर रहा था, तभी देश ने 1947 के बंटवारे का खौफनाक दौर देखा। पाकिस्तान बनने के बावजूद इस अदीब ने अपनी सरजमीं हिंदुस्तान में ही रहने का अटूट फैसला किया। इसके बाद उन्होंने ‘वतन की राह में’ और ‘सारे जहां से अच्छा’ जैसे अमर देशभक्ति गीतों को अपनी कलम से सींचकर वतनपरस्ती की मिसाल पेश की।
सुर कोकिला लता मंगेशकर संग अमर जुगलबंदी
Raja Mehdi Ali Khan के लिखे गीतों को सबसे ज्यादा आवाज स्वर कोकिला लता मंगेशकर ने दी। ‘लग जा गले’, ‘आप की नजरों ने समझा’, ‘नैना बरसे रिमझिम रिमझिम’, ‘मेरा साया साथ होगा’ और मशहूर डांस नंबर ‘झुमका गिरा रे’ जैसे कल्ट गानों ने संगीत की दुनिया में इतिहास रच दिया। करीब दो दशक लंबे अपने फिल्मी सफर में उन्होंने लगभग 125 फिल्मों के लिए 400 से अधिक यादगार गीत तैयार किए।
हंसते-खेलते मासूम बच्चों के बीच थमीं सांसें
बेहद खुशमिजाज और जिंदादिल इंसान माने जाने वाले इस महान फनकार को नन्हे बच्चों से गहरा लगाव था। 29 जुलाई 1966 को महज 50 वर्ष की उम्र में उन्होंने इस दुनिया को अलविदा कह दिया, और उनकी अंतिम घड़ियां भी बच्चों के साथ मुस्कराते हुए गुजरीं।







