ऐतिहासिक जुटान का रहस्य:
महिला किसान सम्मेलन ने उस वक्त सबको हैरान कर दिया जब देश के कोने-कोने से हजारों महिला किसान सीधे दिल्ली के इंदिरा गांधी इनडोर स्टेडियम पहुंच गईं। भारतीय किसान संघ द्वारा आयोजित इस ऐतिहासिक महासम्मेलन में न केवल पारंपरिक खेती की सीमाओं को चुनौती दी गई, बल्कि देश के नीतिगत फैसलों में सीधी हिस्सेदारी की मांग उठाकर सभी को सोचने पर मजबूर कर दिया।
बराबरी का बड़ा संदेश:
मंच से प्रस्तावना रखते हुए अखिल भारतीय महिला संयोजिका मंजू दीक्षित ने स्पष्ट किया कि आज की नारी सिर्फ चूल्हे-चौके तक सीमित नहीं है। उन्होंने जोर देकर कहा कि आधुनिक तकनीक और असीम ऊर्जा के साथ महिलाएं अब परिवार, समाज और देश के सर्वांगीण विकास में बराबरी की भूमिका निभा रही हैं।
महिला किसान सम्मेलन में नीतिगत बदलावों की गूंज
सृजन और संवर्धन की शक्ति:
उद्घाटन सत्र में कोटा कृषि विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. विमला डूंकवाल ने कहा कि नारी शक्ति सृजन और संवर्धन दोनों मोर्चों पर एक साथ नेतृत्व करने में पूरी तरह सक्षम है। इस दौरान संघ के अखिल भारतीय अध्यक्ष के साईं रेड्डी, उपाध्यक्ष सुशीला विश्नोई और मंत्री वीना सतीश ने भी किसानों के अधिकारों और कर्तव्यों पर अपने विचार साझा किए।
जमीन से जुड़े नायकों का सम्मान:
इस ऐतिहासिक महिला किसान सम्मेलन में उत्कृष्ट कार्य करने वाली हस्तियों को आरएसएस के अखिल भारतीय संपर्क प्रमुख रामलाल और राष्ट्र सेविका समिति की सह संपर्क प्रमुख रितु शर्मा ने सम्मानित किया। सम्मानित होने वालों में गौ-कृषि के लिए महाराष्ट्र की सुनंदा सायसिंग, जैविक खेती के लिए बंगाल की दीपाली ओरांव, बीज संरक्षण के लिए गुजरात की कमला बेन और रोजगार सृजन के लिए बिहार की पुष्पा सिंह शामिल रहीं।
2047 के विकसित भारत का संकल्प:
अखिल भारतीय महामंत्री मोहिनी मोहन मिश्र ने चेताया कि वर्ष 2047 तक विकसित भारत का सपना गौ-कृषि और जैविक खेती के बिना अधूरा रहेगा। उन्होंने सरकार से जहरमुक्त खेती और अमृत आहार नीति लागू करने की मांग की, जबकि संगठन मंत्री दिनेश कुलकर्णी ने कहा कि स्वावलंबी महिला किसानों को सम्मान मिलने से ही गांवों का वास्तविक उत्थान होगा।
आत्मनिर्भरता और संस्कृति का संगम:
यह महिला किसान सम्मेलन इसलिए भी असाधारण बना क्योंकि यहां पहुंचीं हजारों अन्नदाता महिलाएं किसी सरकारी मदद के बिना अपने खुद के खर्च और टिकट पर राजधानी पहुंची थीं। अपनी पारंपरिक वेशभूषा, लोकगीतों और नृत्यों से सजी इन जागरूक महिलाओं ने साबित कर दिया कि भारत की असली ताकत अब अपनी आवाज बुलंद कर चुकी है।






