अदालत का बड़ा फैसला: Satlok Ashram Violence Case में पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने एक बड़ा फैसला सुनाते हुए जेल में बंद रामपाल के दामाद और पूर्व सैनिक संजय उर्फ फौजी को नियमित जमानत प्रदान कर दी है। जस्टिस राजेश भारद्वाज और जस्टिस दीपक मनचंदा की खंडपीठ ने हिसार सत्र अदालत के पुराने आदेश को पूरी तरह खारिज कर दिया।
खूनी टकराव और मिनी आर्मी का साया: एफआईआर के खौफनाक पन्नों के अनुसार 18 नवंबर 2014 को जब पुलिस रामपाल को पकड़ने पहुंची, तब आश्रम की छत पर हजारों हथियारबंद समर्थक तैनात थे। पुलिस बल पर पेट्रोल बम, पत्थर और अंधाधुंध गोलियां बरसाई गईं, जिसमें 111 जवान गंभीर रूप से लहूलुहान हो गए थे।
Satlok Ashram Violence Case में दलीलों की जंग
चार साल बाद राहत का आदेश: अभियोजन पक्ष ने संजय के कई सालों तक फरार रहने का हवाला देकर जमानत का कड़ा विरोध किया, लेकिन अदालत में बचाव पक्ष ने बताया कि मुख्य अभियुक्त समेत 940 आरोपियों को पहले ही राहत मिल चुकी है। सतलोक आश्रम की घटना से जुड़े 49 मुख्य गवाहों की गवाही भी पूरी हो चुकी है।
सख्त शर्तों के साथ रिहाई: अदालत ने ‘जमानत नियम और जेल अपवाद’ के संवैधानिक सिद्धांत पर जोर देते हुए Satlok Ashram Violence Case के आरोपी को पांच-पांच लाख के दो मुचलके, 24 घंटे लाइव लोकेशन और हर महीने थाने में हाजिरी लगाने की सख्त शर्तों के साथ रिहा करने का आदेश जारी किया है।






