रहस्यमयी भविष्य की आहट: YouTube Impact Summit में उस वक्त सन्नाटा खिंच गया जब मंच से यह बड़ा सवाल उठा कि क्या आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस भविष्य में असली रचनाकारों का वजूद खत्म कर देगा। सूचना और प्रसारण राज्य मंत्री डॉ. एल. मुरुगन ने साफ किया कि मुकाबला AI बनाम क्रिएटर्स नहीं, बल्कि इंसानी हुनर को तकनीक से सशक्त बनाने का है।
साहस और संवैधानिक सीमाएं: युवा रचनाकारों को कड़ा संदेश देते हुए उन्होंने कहा कि टेक्नोलॉजी जितनी भी तेज रफ्तार पकड़े, संवैधानिक मूल्य कभी नहीं बदलते। रचनाकारों को पूरी आजादी के साथ लेकिन जिम्मेदारी और राष्ट्रीय मर्यादा के दायरे में रहकर अपनी आवाज दुनिया तक पहुंचानी होगी।
अर्थव्यवस्था में ऐतिहासिक उछाल: नई दिल्ली में आयोजित इस सम्मेलन में आई रिपोर्ट ने सबको चौंका दिया, जहां यूट्यूब ने 2025 में भारतीय जीडीपी में 18,000 करोड़ रुपये का भारी योगदान दिया। इसके साथ ही देश भर में 9.6 लाख से अधिक पूर्णकालिक नौकरियों के अवसर पैदा कर डिजिटल क्रांति को गति दी गई।
वैश्विक मंच पर भारतीय धमक: डॉ. मुरुगन ने बताया कि आज देश के 18,000 से अधिक चैनलों के 10 लाख से ज्यादा सब्सक्राइबर्स हो चुके हैं। यही नहीं, भारत में तैयार होने वाले वीडियो कंटेंट का 15 प्रतिशत से अधिक वॉच-टाइम देश की सीमाओं के पार विदेशी दर्शकों से आ रहा है।
ऑरेंज इकोनॉमी का विस्तार: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दृष्टिकोण का जिक्र करते हुए उन्होंने कंटेंट, क्रिएटिविटी और कल्चर को भारत की सबसे बड़ी ताकत करार दिया। इस रचनात्मक आंदोलन के जरिए भारत अब सिर्फ कंटेंट का उपभोक्ता नहीं, बल्कि वैश्विक बौद्धिक संपदा का मालिक बनने की राह पर है।
भविष्य की नौकरियों का खाका: YouTube Impact Summit में बजट प्रावधानों का उल्लेख करते हुए बताया गया कि 15,000 स्कूलों और 500 कॉलेजों में विशेष लैब बन रही हैं। वर्ष 2030 तक इस पूरे रचनात्मक उद्योग को लगभग 20 लाख उच्च कुशल पेशेवरों की तत्काल आवश्यकता पड़ने वाली है।
वैश्विक दिग्गजों की मौजूदगी: समारोह में यूट्यूब इंडिया की कंट्री मैनेजिंग डायरेक्टर गुंजन सोनी, ग्लोबल पॉलिसी वाइस प्रेसिडेंट लेस्ली मिलर और संयुक्त सचिव सेंथिल राजन मौजूद रहे। भारत वर्ष 2047 तक विकसित राष्ट्र बनने के लक्ष्य के साथ अपनी डिजिटल सीमाओं को दुनिया भर में तेजी से फैला रहा है।






