41वीं इंदिरा मैराथन के ट्रैक पर क्या टूटेगा इतिहास?41वीं इंदिरा मैराथन प्रयागराज की सड़कों पर 19 नवंबर को एक ऐसे अनसुलझे रहस्य के साथ लौटने जा रही है, जिसने पिछले 39 वर्षों से देश के दिग्गज एथलीटों को गहरी चुनौती में डाल रखा है। हर साल सैकड़ों धावक पूरी ताकत झोंकते हैं, लेकिन एक ऐतिहासिक दीवार आज तक कोई नहीं लांघ सका।
स्वरूप सिंह की वो अविश्वसनीय 1986 की दौड़वर्ष 1986 में बिना आधुनिक तकनीक, बिना जीपीएस ट्रैकर और बिना एनर्जी ड्रिंक्स के स्वरूप सिंह ने 42.195 किलोमीटर की दूरी महज 2 घंटे 13 मिनट 57 सेकेंड में तय कर इतिहास रचा था। 39 साल बीत चुके हैं, राम सिंह यादव, दीप चंद्र और शेर सिंह जैसे धुरंधर करीब तो पहुंचे, मगर कोई भी इस रिकॉर्ड को ध्वस्त नहीं कर सका।
सत्यभामा का 1996 का अजेय जादूमहिला वर्ग में सत्यभामा द्वारा 1996 में दर्ज 2 घंटे 44 मिनट 40 सेकेंड का समय आज तक अटूट बना हुआ है। 2024 में सोनिका ने 2 घंटे 45 मिनट 28 सेकेंड का शानदार समय निकालकर सनसनी मचाई थी, मगर वह भी रिकॉर्ड से केवल 48 सेकेंड पीछे रह गईं।
41वीं इंदिरा मैराथन में क्या रचेगा नया इतिहास?संगम नगरी में 41वीं इंदिरा मैराथन के लिए ऑनलाइन पंजीकरण की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है और देशभर के 500 से ज्यादा चुनिंदा धावक अपनी रणनीति तैयार कर रहे हैं। मदन मोहन मालवीय स्टेडियम से आनंद भवन तक गूंजती इस ऐतिहासिक दौड़ में क्या इस बार कोई नया धावक 41वीं इंदिरा मैराथन के इस 39 साल पुराने तिलिस्म को तोड़ पाएगा?






