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एग डोनेशन को लेकर बड़ा खुलासा: एक महिला जीवन में कितनी बार दान कर सकती है अंडाणु, जानें क्या कहता है भारतीय कानून

एक महिला कितनी बार कर सकती है Egg Donation?

एक महिला कितनी बार कर सकती है Egg Donation और क्या बार-बार अंडाणु निकालना पूरी तरह सुरक्षित है? यह सवाल इन विट्रो फर्टिलाइजेशन (IVF) उपचार के इस दौर में बेहद महत्वपूर्ण हो गया है। चिकित्सा जगत में इसे ‘थर्ड पार्टी रिप्रोडक्शन’ कहा जाता है। इस प्रक्रिया में एक स्वस्थ महिला के अंडाणुओं (Eggs) को निकालकर उस दंपत्ति को दिया जाता है, जो माता-पिता बनने में असमर्थ हैं।

भारत के ART एक्ट 2021 का कड़ा नियम

भारत सरकार के ‘असिस्टेड रिप्रोडक्टिव टेक्नोलॉजी यानी सहायक प्रजनन तकनीक (Regulation) ART एक्ट, 2021’ के तहत देश में बेहद सख्त कानून लागू हैं। इस कानून के मुताबिक कोई भी योग्य महिला अपने पूरे जीवनकाल में केवल एक ही बार एग डोनेट कर सकती है। वैश्विक स्तर पर (जैसे अमेरिका में ASRM द्वारा) अधिकतम 6 बार की छूट है, लेकिन भारत में बार-बार अंडाणु निकालने पर पूरी तरह कानूनी प्रतिबंध है।

डोनर के लिए निर्धारित उम्र की सीमा

अधिनियम के दिशा-निर्देशों के अनुसार भारत में केवल 23 से 35 वर्ष की आयु के बीच की स्वस्थ महिला ही अंडाणु दान करने के योग्य मानी जाती है। डॉक्टरों के मुताबिक यह आयु सीमा इसलिए तय की गई है क्योंकि इस दौरान महिला के अंडों की गुणवत्ता (Egg Quality) और संख्या सबसे बेहतर होती है। यह नियम डोनर की शारीरिक सुरक्षा और उसकी भविष्य की प्रजनन क्षमता (Fertility) को सुरक्षित रखने के उद्देश्य से बनाया गया है।

क्यों जरूरी है यह कानूनी पाबंदी?

आईवीएफ विशेषज्ञों का मानना है कि बार-बार ओवेरियन स्टिमुलेशन (अंडाशय को हार्मोनल इंजेक्शन से उत्तेजित करना) करने से महिला के शरीर पर भारी दबाव पड़ता है। इससे ‘ओवेरियन हाइपरस्टिमुलेशन सिंड्रोम’ (OHSS) जैसी गंभीर और दुर्लभ बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। ऐसे में भारतीय कानून का यह एक बार का नियम महिलाओं के स्वास्थ्य से किसी भी तरह के खिलवाड़ को रोकने के लिए एक मजबूत सुरक्षा कवच है।

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