Genetic Makeup Lung Cancer Study ने वर्षों पुराने एक बड़े रहस्य पर से पर्दा उठाकर पूरी मेडिकल दुनिया को हैरान कर दिया है कि आखिर भारी स्मोकिंग करने वाले कुछ लोग इस जानलेवा बीमारी से कैसे बच निकलते हैं।
वैज्ञानिकों ने खोजा डीएनए का सुरक्षा चक्र अंतरराष्ट्रीय शोधकर्ताओं की एक टीम ने पाया कि कुछ भाग्यशाली स्मोकर्स के शरीर में एक विशेष आनुवंशिक सुरक्षा तंत्र मौजूद होता है जो फेफड़ों की कोशिकाओं में म्यूटेशन को रोकता है।
डीएनए रिपेयर मैकेनिज्म निभाता है अहम रोल वैज्ञानिकों का मानना है कि इन व्यक्तियों में डीएनए रिपेयर मैकेनिज्म बेहद मजबूत और सक्रिय होता है, जो सिगरेट के धुएं से होने वाले घातक आनुवंशिक नुकसान की तुरंत मरम्मत कर देता है।
Genetic Makeup Lung Cancer Study का चौंकाने वाला निष्कर्ष वैज्ञानिक रिसर्च के अनुसार लगातार धूम्रपान करने से फेफड़ों में उत्परिवर्तन यानी जेनेटिक म्यूटेशन तेजी से बढ़ते हैं, लेकिन एक निश्चित सीमा के बाद कुछ लोगों के शरीर में यह म्यूटेशन दर खुद-ब-खुद थम जाती है।
कोशिकाओं की आत्म-रक्षा की क्षमता जिन लोगों का आनुवंशिक ढांचा मजबूत होता है, उनके फेफड़ों की उपकला कोशिकाएं (epithelial cells) टॉक्सिक तत्वों के प्रति अधिक सहनशील पाई गई हैं, जिससे कैंसर कोशिकाओं का निर्माण रुक जाता है।
धूम्रपान के बावजूद कम खतरा शोध में पाया गया कि हालांकि सिगरेट पीना बेहद खतरनाक है, लेकिन Genetic Makeup Lung Cancer Study यह स्पष्ट करती है कि जेनेटिक सुरक्षा वाले व्यक्ति अत्यधिक स्मोकिंग के बाद भी ट्यूमर से बचे रहते हैं।
कैंसर रिसर्च में मिलेगी बड़ी मदद यह क्रांतिकारी खोज भविष्य में फेफड़ों के कैंसर के शुरुआती निदान, जोखिम मूल्यांकन और व्यक्तिगत जीन थेरेपी विकसित करने की दिशा में मील का पत्थर साबित हो सकती है।
धूम्रपान छोड़ना ही सबसे सुरक्षित विकल्प विशेषज्ञों ने सख्त चेतावनी दी है कि इस जेनेटिक सुरक्षा पर निर्भर रहना खतरनाक हो सकता है, क्योंकि धूम्रपान करने वाले अधिकांश लोगों में ऐसा मजबूत जेनेटिक शील्ड नहीं होता है।
भविष्य की चिकित्सा पर असर मेडिकल जगत का मानना है कि Genetic Makeup Lung Cancer Study के आधार पर आने वाले समय में हाई-रिस्क वाले स्मोकर्स की पहचान करके उनका समय रहते जीवन बचाया जा सकेगा।





