Anti Paper Leak Bill पर लोकसभा में चर्चा के दौरान उस समय भारी हड़कंप मच गया जब विपक्ष ने परीक्षा धांधली और युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ के मुद्दे पर सरकार पर तीखे हमलों की बौछार कर दी।
परीक्षार्थियों के भविष्य पर बनी सहमति लोकसभा में भले ही सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच तीखे आरोप-प्रत्यारोप लगे, लेकिन दोनों पक्षों ने इस बात पर पूर्ण सहमति जताई कि मौजूदा परीक्षा प्रणाली और शिक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार अत्यंत अनिवार्य हो चुके हैं।
अखिलेश यादव का तीखा हमला समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने सदन में दहाड़ते हुए कहा कि अगर मौजूदा कानून इतने प्रभावी थे, तो भाजपा के शासनकाल में 20 से अधिक प्रतियोगी परीक्षाओं के पर्चे कैसे लीक हो गए।
छात्र आंदोलन के आगे झुकी सरकार उन्होंने आरोप लगाया कि विशाल छात्र आंदोलन के दबाव में आकर ही सरकार को झुकना पड़ा और युवाओं की मांगों के आगे लाचार होकर आखिरकार शिक्षा मंत्री का इस्तीफा कराना पड़ा।
Anti Paper Leak Bill के बीच बड़ा दावा अखिलेश यादव ने कहा कि युवा पीढ़ी ने यह साबित कर दिया है कि सरकार भी झुकती है, बस झुकाने वाला चाहिए, और मांग की कि आंदोलन के दौरान छात्रों से किए गए सभी वादे तत्काल पूरे किए जाएं।
डिंपल यादव ने उठाए गंभीर सवाल सपा सांसद डिंपल यादव ने भावुक लहजे में कहा कि पेपर लीक की वजह से 20 छात्रों ने आत्महत्या कर ली, लेकिन इसके बावजूद सरकार ने आंदोलनकारी युवाओं के साथ बेहद असंवेदनशील और दमनात्मक रवैया अपनाया।
आलोक कुमार सुमन ने जताई चिंता जदयू सांसद आलोक कुमार सुमन ने कहा कि पर्चा लीक और नकल एक भयानक सामाजिक बुराई है, जिसके पीछे सक्रिय संगठित माफिया गिरोहों पर कठोरतम कानूनी कार्रवाई करना बेहद जरूरी है।
अरुण भारती ने किया समर्थन लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के सांसद अरुण भारती ने कहा कि परीक्षा रद्द होने का सबसे बड़ा खामियाजा ईमानदार छात्रों को भुगतना पड़ता है, इसलिए परीक्षा प्रणाली में पूर्ण पारदर्शिता लानी ही होगी।
सुप्रिया सुले की SIT जांच की मांग एनसीपी (शरदचंद्र पवार) सांसद सुप्रिया सुले ने जंतर-मंतर पर प्रदर्शनकारी छात्रों के खिलाफ हुई पुलिस कार्रवाई की एसआईटी जांच कराने की मांग करते हुए इसे देश के करोड़ों युवाओं के भविष्य का सवाल बताया।
Anti Paper Leak Bill के दौरान तीखी बहस सदन के भीतर विभिन्न दलों के नेताओं ने माना कि नकल माफिया की कमाई का जरिया बनने से युवाओं की वर्षों की कड़ी मेहनत पानी में बह जाती है, जिस पर तुरंत पूर्ण विराम लगाना होगा।
संसदीय गतिरोध के बीच बड़ा संदेश इस महत्वपूर्ण विधेयक पर हुई मैराथन बहस ने साफ कर दिया कि देश का युवा अब किसी भी सूरत में परीक्षाओं में धांधली और पेपर लीक को सहन करने के मूड में बिल्कुल नहीं है।





