India China WMCC Meet की 36वीं बैठक में भारत ने ड्रैगन की नई चालबाजी को नाकाम करने के लिए एक ऐसा कदम उठाया है, जिसने चीन के खेमे में हलचल तेज कर दी है।
साझा नदियों पर मांगा गया पूरा ब्यौरा भारत ने चीन से यारलुंग त्सांगपो (ब्रह्मपुत्र) नदी पर बन रही जलविद्युत परियोजनाओं का विस्तृत तकनीकी ब्यौरा तुरंत साझा करने की स्पष्ट मांग रखी है।
36वीं बैठक में उठा अहम मुद्दा भारत-चीन सीमा मामलों पर परामर्श और समन्वय के लिए गठित कार्य तंत्र (WMCC) की इस बैठक में भारतीय दल का नेतृत्व संयुक्त सचिव सुजीत घोष ने किया।
चीनी प्रतिनिधिमंडल के साथ सीधी चर्चा चीन की ओर से विदेश मंत्रालय की महानिदेशक सुश्री होउ यानकी ने हिस्सा लिया, जहां दोनों पक्षों ने एलएसी पर सुरक्षा स्थिति की समीक्षा की।
विशेषज्ञ स्तर वार्ता की नई मांग भारत ने कहा कि सीमा पार बहने वाली नदियों पर विशेषज्ञ स्तर के तंत्र की अगली बैठक जल्द बुलाई जानी चाहिए ताकि अपस्ट्रीम डेटा मिल सके।
चीन छुपा रहा है जरूरी जानकारी दोनों देशों के बीच जल प्रवाह सूचनाएं साझा करने का समझौता तो है, लेकिन चीन अक्सर नई परियोजनाओं का आधिकारिक ब्यौरा भारत को देने से बचता रहता है।
बाढ़ और आपदा नियंत्रण पर संकट तकनीकी आंकड़े न मिलने से पूर्वोत्तर भारत में बाढ़ प्रबंधन, सिंचाई योजना और आपात स्थितियों से निपटने में गंभीर बाधा उत्पन्न होने का खतरा बना रहता है।
पारदर्शिता से ही बढ़ेगा आपसी भरोसा भारतीय पक्ष ने साफ कहा कि नदियों के जल प्रवाह का नियमित और पारदर्शी आदान-प्रदान ही दोनों देशों के बीच वास्तविक विश्वास बहाल कर सकता है।
एलएसी पर शांति बनाए रखने का संकल्प बैठक के दौरान दोनों देशों ने माना कि सीमावर्ती क्षेत्रों में शांति और स्थिरता बनाए रखना द्विपक्षीय संबंधों के समग्र विकास के लिए अनिवार्य शर्त है।
सैन्य व राजनयिक चैनल रहेंगे सक्रिय गलतफहमी से बचने के लिए दोनों देश स्थानीय कमांडर-स्तरीय बैठकों और WMCC जैसे मौजूदा राजनयिक तथा सैन्य माध्यमों का निरंतर उपयोग करने पर सहमत हुए।
वरिष्ठ अधिकारियों की रही मौजूदगी इस महत्वपूर्ण बैठक में दोनों देशों के विदेश, रक्षा, गृह और आप्रवासन विभागों के शीर्ष अधिकारियों ने भाग लिया और शांति समझौते को दोहराया।





