डिजिटल भुगतान पर बड़ा सस्पेंस: Free UPI Transactions को लेकर देश भर के करोड़ों स्मार्टफोन यूजर्स के मन में एक गहरा भ्रम बना हुआ था। लोकसभा में नए टैक्स संशोधन बिल के पास होते ही यह खबर तेजी से फैली कि अब हर ऑनलाइन भुगतान पर जेब ढीली करनी पड़ेगी।
सरकार का आधिकारिक स्पष्टीकरण: Free UPI Transactions की सुविधा पर उठे तमाम सवालों को खारिज करते हुए वित्त मंत्रालय ने स्थिति पूरी तरह साफ कर दी है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि आम नागरिकों के लिए पर्सन-टू-पर्सन (P2P) लेनदेन हमेशा की तरह पूरी तरह मुफ्त रहेंगे।
MDR नियमों की पूरी सच्चाई: Free UPI Transactions के इस नए तंत्र में भविष्य में यदि मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) लागू भी होता है, तो वह आम उपभोक्ताओं पर नहीं लगेगा। यह शुल्क केवल बड़े बिजनेस ट्रांजैक्शन की सीमित श्रेणियों पर बेहद मामूली दर से लगाया जाएगा।
रोजमर्रा के भुगतानों पर असर नहीं: Free UPI Transactions व्यवस्था के अंतर्गत 2,000 रुपये से अधिक के कमर्शियल लेनदेन पर ही केवल 0.25% से 0.4% MDR की संभावना है। लिहाजा दूध, सब्जी, किराना और ऑटो-कैब जैसे दैनिक भुगतानों पर इसका कोई असर नहीं पड़ेगा।
डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर की सुरक्षा: पेमेंट एंड सेटलमेंट सिस्टम्स एक्ट की धारा 10A में संशोधन के बाद NPCI की स्टीयरिंग कमिटी ही अंतिम निर्णय लेगी। बढ़ते साइबर फ्रॉड को रोकने और नेटवर्क को आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से ही यह रणनीतिक कदम उठाया गया है।





