स्कूली वाहनों पर सरकार का बड़ा कदम: UP School Bus Safety Rules को लेकर उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने अचानक एक बेहद सख्त और अभूतपूर्व फरमान जारी कर दिया है। बच्चों की सुरक्षा को लेकर परिवहन विभाग द्वारा राज्य के सभी शिक्षण संस्थानों के प्रबंधकों को भेजे गए इस आधिकारिक पत्र के बाद अब ढिलाई बरतने वाले स्कूलों पर कड़ी कार्रवाई का खतरा मंडराने लगा है।
चालकों का चरित्र सत्यापन अनिवार्य: UP School Bus Safety Rules के नए प्रावधानों के तहत अब सभी स्कूल वाहनों के चालकों का अनिवार्य रूप से पुलिस चरित्र सत्यापन और नियमित मेडिकल टेस्ट कराना होगा। मुख्यमंत्री के समीक्षा बैठकों में दिए गए कड़े निर्देशों के बाद विभाग ने साफ कर दिया है कि किसी भी आपराधिक या अयोग्य व्यक्ति को बस स्टीयरिंग सौंपने वाले संस्थानों को बख्शा नहीं जाएगा।
12 वर्ष से कम बच्चों के लिए अटेंडेंट: UP School Bus Safety Rules में छोटे बच्चों की आवाजाही को लेकर भी एक बेहद महत्वपूर्ण नियम जोड़ दिया गया है। 12 वर्ष या उससे कम आयु के बच्चों को ले जाने वाली हर बस में एक परिचारक या परिचारिका का होना अनिवार्य होगा, जो बच्चों को सुरक्षित वाहन में चढ़ाने और उतारने की पूरी जिम्मेदारी निभाएंगे।
ट्रांसपोर्ट इंचार्ज की मासिक जिम्मेदारी: UP School Bus Safety Rules के पालन हेतु स्कूल के ट्रांसपोर्ट इंचार्ज को हर महीने वाहनों के फर्स्ट एड किट, अग्निशामक यंत्र, इमरजेंसी अलार्म और सुरक्षा मानकों की जांच करके रिपोर्ट अपडेट रखनी होगी। अनफिट, बिना परमिट या बिना वैध बीमा वाली बसों का संचालन तुरंत प्रभाव से प्रतिबंधित कर दिया गया है।
सड़क पर सघन जांच अभियान: UP School Bus Safety Rules का सख्ती से क्रियान्वयन सुनिश्चित करने के लिए परिवहन विभाग की टीमें सड़कों पर लगातार औचक निरीक्षण करेंगी। अलीगढ़ और कानपुर जैसे हादसों से सबक लेते हुए शासन ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि बच्चों की जान जोखिम में डालने वाले प्रबंधकों के खिलाफ तत्काल दंडात्मक कानूनी कार्रवाई की जाएगी।





