OPEC Plus Oil Production में होने जा रही भारी बढ़ोतरी ने वैश्विक ऊर्जा बाजार में एक नया भूचाल ला दिया है, जिसका सीधा और बड़ा असर दुनिया के सबसे बड़े तेल आयातक देशों पर पड़ने वाला है। कच्चे तेल की सप्लाई चेन को मजबूत करने के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर यह एक बहुत बड़ा रणनीतिक फैसला माना जा रहा है।
अगस्त से बढ़ेगा उत्पादन सात बड़े देशों ने मिलाया हाथ क्योंकि ओपेक प्लस संगठन के प्रमुख सदस्यों ने आगामी अगस्त महीने से हर दिन 1.88 लाख बैरल अतिरिक्त कच्चे तेल के उत्पादन को हरी झंडी दे दी है। इस ऐतिहासिक फैसले में सऊदी अरब, रूस, इराक, कुवैत, कजाखस्तान, अल्जीरिया और ओमान जैसे शक्तिशाली तेल उत्पादक देश शामिल हैं।
युद्ध के असर से मिली राहत कच्चे तेल की कीमतों में आई भारी गिरावट जिसके बाद अब दाम घटकर पश्चिम एशिया संकट से पहले वाले सामान्य स्तर पर आ चुके हैं। हाल ही में अमेरिका और ईरान के बीच हुए अंतरिम समझौते के बाद होर्मुज स्ट्रेट जलमार्ग से जहाजों की सुरक्षित आवाजाही काफी तेज हो गई है, जिससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड ऑयल की कीमत करीब 72 डॉलर प्रति बैरल पर आ टिकी है।
सतर्कता के साथ मॉनिटरिंग बाजार की स्थिरता पर विशेष ध्यान देते हुए ओपेक प्लस संगठन ने साफ किया है कि वे लगातार वैश्विक बाजार की स्थितियों का बारीकी से आकलन कर रहे हैं। लगातार यह पांचवां महीना है जब तेल उत्पादक देशों ने बाजार में संतुलन और कीमतों को नियंत्रित रखने के लिए अपने सतर्क दृष्टिकोण के तहत उत्पादन बढ़ाने पर सहमति जताई है।
भारत को होगा बंपर फायदा OPEC Plus Oil Production की बढ़ोतरी से भारत खुश क्योंकि देश अपनी कुल जरूरत का लगभग 90 प्रतिशत कच्चा तेल दूसरे देशों से आयात करता है। वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की सप्लाई बढ़ने और कीमतें लगातार स्थिर रहने से भारत को अपना विदेशी मुद्रा भंडार बचाने में मदद मिलेगी, जिससे घरेलू बाजार में पेट्रोल और डीजल के दामों में बड़ी राहत मिलने की उम्मीद बढ़ गई है।






