Champat Rai Resignation ने अयोध्या से लेकर पूरे देश के राजनीतिक और धार्मिक गलियारों में एक ऐसा सन्नाटा खींच दिया है, जिसकी किसी ने कल्पना भी नहीं की थी। श्रीराम जन्मभूमि परिसर में हुए करोड़ों रुपये के चढ़ावा और आभूषण चोरी के सनसनीखेज मामले के बाद आखिरकार यह सबसे बड़ा प्रशासनिक धमाका हो चुका है।
इस्तीफा हुआ मंजूर Champat Rai Resignation को श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की एक आपातकालीन और बेहद तनावपूर्ण बैठक में आधिकारिक तौर पर स्वीकार कर लिया गया है। इस हाई-प्रोफाइल बैठक की अध्यक्षता कर रहे अस्वस्थ महंत नृत्य गोपाल दास खुद इस मामले से बेहद आहत नजर आए।
संतों का फूटा गुस्सा ट्रस्ट की बैठक में भारी हंगामा देखने को मिला जहां स्वामी परमानंद गिरी महाराज और जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी वासुदेवानंद सरस्वती सहित कई वरिष्ठ संत और सदस्य आपे से बाहर हो गए। संतों ने दो टूक शब्दों में कहा कि रामलला के चढ़ावे की चोरी ने दुनिया भर के करोड़ों हिंदुओं की आस्था और भावनाओं को गहरी ठेस पहुंचाई है।
जांच में हुआ खुलासा एसआईटी की तफ्तीश में चौंकाने वाले सच सामने आने के बाद उत्तर प्रदेश सरकार की तीन सदस्यीय विशेष जांच टीम ने करीब 150 लोगों के बयान दर्ज किए थे। जांच में चंपतराय के पूर्व ड्राइवर रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू और ट्रस्टी डॉ. अनिल कुमार मिश्रा के बयानों में भारी विसंगतियां पाई गईं, जिसके बाद इन पर शिकंजा कसना तय हो गया था।
बड़ी कानूनी कार्रवाई आरोपियों की हुई तत्काल गिरफ्तारी क्योंकि ट्रस्ट की ही शिकायत पर अयोध्या की रामजन्मभूमि कोतवाली में बीएनएस की गंभीर धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज किया गया था। इस मामले में अनुकल्प मिश्र, लवकुश मिश्र, मनीष यादव और राजेश पाठक समेत 8 लोगों को नामजद कर पुलिस ने तुरंत हिरासत में ले लिया।
ट्रस्ट से हुए बाहर Champat Rai Resignation के साथ ही अब चंपतराय और डॉ. अनिल कुमार मिश्रा पूरी तरह से राम मंदिर ट्रस्ट की निर्णय प्रक्रिया से बाहर हो चुके हैं। आगामी 11 जुलाई को होने वाली ट्रस्ट की त्रैमासिक बैठक में अब एक प्रशासनिक अधिकारी को मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) नियुक्त करने और ट्रस्ट के पूर्ण पुनर्गठन पर अंतिम मुहर लग सकती है।






