Taiwan Reserve Training में किए गए ऐतिहासिक बदलावों ने अब बीजिंग के सैन्य मुख्यालय में भारी खलबली मचा दी है। चीन के लगातार बढ़ते चौतरफा आक्रामक सैन्य दबाव और अपनी सेना में सैनिकों की भारी कमी से निपटने के लिए ताइवान ने अब तक का सबसे बड़ा रक्षा सुधार लागू कर दिया है।
दोगुनी हुई अवधि: अब 7 के बजाय 14 दिनों तक दी जाएगी घातक ट्रेनिंग
ताइवान ने चीन को सीधा और कड़ा संदेश देने के लिए अपने पुराने 5 से 7 दिनों के मिलिट्री कॉल-अप प्रोग्राम को हमेशा के लिए समाप्त कर दिया है। अब इस साल से सभी पात्र रिजर्व सैनिकों के लिए 14 दिनों की बेहद कठिन और अनिवार्य सैन्य युद्ध ट्रेनिंग का कोर्स पूरी तरह लागू कर दिया गया है।
ड्रोन का इस्तेमाल: आधुनिक युद्ध की तकनीक से लैस होंगे ताइवान के सैनिक
आधुनिक युद्ध की रणनीतियों को ध्यान में रखते हुए ताइवान के रक्षा मंत्रालय ने यूक्रेन युद्ध से मिले सबसे बड़े सबक को अपने सिस्टम में शामिल किया है। अब सभी रिजर्व सैनिकों को अत्याधुनिक सर्विलांस और हमलावर ड्रोन ऑपरेशन्स चलाने का विशेष ट्रेनिंग कोर्स अनिवार्य रूप से दिया जा रहा है।
अमेरिकी मिसाइलें: ताइवान की धरती पर गरजेगा खतरनाक HIMARS रॉकेट सिस्टम
अमेरिकी HIMARS रॉकेट सिस्टम (High Mobility Artillery Rocket System) को चलाने का एडवांस प्रशिक्षण अब इन रिजर्व सैनिकों की ताकत को कई गुना बढ़ा देगा। 300 किलोमीटर की अचूक मारक क्षमता रखने वाले इस गाइडेड लॉन्चर से ताइवान अपने तटों की रक्षा करने में पूरी तरह सक्षम होगा।
घटती जन्मदर का संकट: सैनिकों की कमी से निपटने के लिए उठाया बड़ा कदम
Taiwan Reserve Training को अपग्रेड करने की मुख्य वजह ताइवान में युवाओं की तेजी से घटती संख्या और जनसांख्यिकीय संकट है। साल 2023 में सैन्य सेवा के योग्य पुरुषों की संख्या पहली बार 1 लाख से नीचे गिरकर मात्र 97,828 रह गई थी, जो अगले साल और कम होने वाली है।
सेना का खाली पूल: सिर्फ 79 फीसदी स्टाफ के साथ चल रहा है रक्षा मंत्रालय
सैनिकों की भर्ती के तमाम कड़े प्रयासों के बावजूद ताइवान की सशस्त्र सेनाओं का कुल स्टाफ स्तर गिरकर केवल 79 प्रतिशत पर आ गया है। सैन्य नियोक्ताओं ने साफ चेतावनी दी है कि ताइवान के पास आधुनिक हथियार तो आ रहे हैं लेकिन उन्हें चलाने के लिए प्रशिक्षित इंसानी ताकत की भारी कमी है।
10 घंटे का कड़ा अभ्यास: युद्ध के मैदान में टिकने के लिए पसीना बहा रहे जवान
ऑल-आउट डिफेंस मोबिलाइजेशन एजेंसी के मुताबिक, रिजर्व सैनिकों को अब हर दिन कम से कम 10 घंटे की कड़ी ट्रेनिंग से गुजरना पड़ रहा है। इस नए कोर्स में लाइव-फायर ड्रिल, युद्धक्षेत्र में दी जाने वाली प्राथमिक चिकित्सा, छलावरण (कैमफ्लाज) और रात्रिकालीन कठिन मार्च शामिल हैं।
मूल पदों पर वापसी: जिस विभाग में की थी नौकरी, वहीं संभालेंगे अपनी कमान
रक्षा मंत्री वेलिंगटन कू ली-ह्सिउंग ने आधिकारिक रूप से स्पष्ट किया है कि ‘मूल पदों पर कर्मियों की वापसी’ की नीति को कड़ाई से लागू किया जा रहा है। जिन सैनिकों ने अपनी सक्रिय सेवा के दौरान पहले ड्रोन या HIMARS चलाया था, उन्हें केवल उसी विशेषज्ञता की रिफ्रेशर ट्रेनिंग दी जा रही है।
महिलाओं की भागीदारी: देश की सुरक्षा में महिला सिपाही भी निभाएंगी बड़ी भूमिका
आधिकारिक अधिकारियों ने बताया कि जिन महिलाओं ने पूर्व में देश की सक्रिय सैन्य इकाइयों में अपनी सेवाएं दी थीं, उन्हें भी इस मोर्चे पर शामिल किया जाएगा। सेवा छोड़ने के बाद भी राष्ट्रीय सुरक्षा और देश की अखंडता को बनाए रखने के लिए उनका योगदान लगातार लिया जाता रहेगा।
विशेषज्ञों की बड़ी चिंता: क्या सिर्फ लंबी ट्रेनिंग से हल हो पाएगी सैनिकों की किल्लत
रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि केवल ट्रेनिंग की अवधि बढ़ा देने भर से ताइवान की जनशक्ति की यह गंभीर समस्या पूरी तरह हल नहीं हो सकती। पूर्व रक्षा प्रवक्ता लू दे-युन ने कहा कि रिजर्व बल के लिए युद्ध के समय की भूमिकाएं अभी भी बहुत स्पष्ट रूप से परिभाषित नहीं की जा सकी हैं।
भविष्य की बड़ी तैयारी: आधुनिक हथियारों के साथ हर मोर्चे पर मुस्तैद ताइवान
Taiwan Reserve Training में किया गया यह आमूलचूल परिवर्तन ताइवान की सेना को ‘शूट-एंड-स्कूट’ जैसी रणनीतियों में माहिर बना रहा है। चीन के किसी भी संभावित समुद्री या हवाई हमले को पूरी तरह नाकाम करने के लिए ताइवान अपनी पूरी ताकत से इस आधुनिक युद्ध की तैयारी में जुटा है।






