रहस्यों और उपलब्धियों से भरा नया अध्याय
जितेंद्र मिश्र राम मंदिर ट्रस्ट सीईओ के रूप में जैसे ही घोषित किए गए, पूरे देश में यह खबर कौतूहल और गर्व का विषय बन गई। देवरिया जनपद के श्रीरामपुर थाना क्षेत्र अंतर्गत स्थित एक साधारण सा गांव भोपतपुरा अचानक राष्ट्रीय सुर्खियों के केंद्र में आ गया। पश्चिमी वायु कमान के पूर्व प्रमुख रहे एयर मार्शल को अयोध्या के श्रीराम जन्मभूमि मंदिर ट्रस्ट का पहला मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) चुना गया है।
गांव की गलियों में गूंजे पटाखों के धमाके
घोषणा की आधिकारिक सूचना पहुंचते ही भोपतपुरा में उत्सव जैसा दृश्य छा गया और ग्रामीण खुशी से झूम उठे। ग्रामीणों ने आतिशबाजी कर अपनी खुशी का इजहार किया और एक-दूसरे का मुंह मीठा कराकर जश्न मनाया। हर किसी के चेहरे पर इस बात का गर्व था कि उनके माटी के सपूत को देश के सबसे प्रतिष्ठित मंदिर प्रबंधन की कमान सौंपी गई है।
सैन्य रणनीतियों से लेकर रामनगरी के प्रबंधन तक
जितेंद्र मिश्र राम मंदिर ट्रस्ट सीईओ बनने से पहले भारतीय वायुसेना में अनुशासित और रणनीतिक नेतृत्व के लिए विख्यात रहे हैं। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान उनकी असाधारण सैन्य भूमिका रही थी, जिसकी व्यक्तिगत रूप से देश के प्रधानमंत्री ने भी भूरि-भूरि प्रशंसा की थी। अब उसी प्रशासनिक अनुभव और सख्त अनुशासन का लाभ श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र के दैनिक कामकाज तथा व्यवस्थाओं को मिलेगा।
जड़ों से अटूट जुड़ाव और सादगी भरा व्यक्तित्व
ग्रामीणों के अनुसार, वायुसेना के इतने शीर्ष पदों पर कार्य करने के बाद भी उनका अपने पैतृक गांव से आत्मीय नाता कभी कमजोर नहीं हुआ। पारिवारिक वैवाहिक आयोजनों और प्रमुख पर्व-त्योहारों पर उनका गांव आना नियमित रूप से बना रहता है। स्थानीय निवासी आज भी उनके बेहद सरल, निष्कपट और मृदुभाषी व्यवहार की मिसालें पेश करते हैं।
जितेंद्र मिश्र राम मंदिर ट्रस्ट सीईओ: प्रशासनिक और पारिवारिक पृष्ठभूमि
शिक्षा और राष्ट्र सेवा को समर्पित परिवार
परिवार में दो भाइयों में बड़े जितेंद्र मिश्र का संयुक्त परिवार वर्तमान में दिल्ली के मयूर विहार इलाके में निवास करता है। उनके छोटे भाई देवेंद्र मिश्र दिल्ली स्थित मौलाना आजाद मेडिकल कॉलेज में प्रोफेसर पद पर कार्यरत हैं। वहीं उनकी बहन वंदना मिश्र प्रतिष्ठित जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू), दिल्ली में प्रोफेसर के रूप में अपनी सेवाएं दे रही हैं।
अगली पीढ़ी का वैश्विक और राष्ट्रीय फलक
परिवार की नई पीढ़ी भी प्रशासनिक और शैक्षणिक मोर्चे पर अपनी विशिष्ट पहचान बनाने में अग्रसर दिखती है। बड़े पुत्र शांतनु मिश्र बीटेक की शिक्षा पूर्ण करने के उपरांत राजधानी दिल्ली में रहकर संघ लोक सेवा आयोग (IAS) की तैयारी में जुटे हैं। छोटे पुत्र शारण्य मिश्र ने लंदन से पीएचडी की उपाधि प्राप्त की है और वर्तमान में वहीं उच्च पद पर कार्यरत हैं।
प्रेरणास्रोत बनकर उभरी नई जिम्मेदारी
जितेंद्र मिश्र राम मंदिर ट्रस्ट सीईओ के दायित्व से न केवल रामनगरी की प्रशासनिक व्यवस्था सुदृढ़ होगी, बल्कि पूर्वांचल का यह कोना भी गौरवान्वित हुआ है। चचेरे भाई विपिन मिश्र, विनीत मिश्र, अंकित मिश्र और राम प्यारे मिश्र सहित समस्त ग्रामीणों ने उनकी इस ऐतिहासिक नियुक्ति पर हार्दिक शुभकामनाएं दीं। सरहद की रक्षा से लेकर धर्मनगरी की सेवा तक का उनका यह सफर आने वाली पीढ़ियों को निरंतर प्रेरित करता रहेगा।






