रहस्यमयी बदलाव का नया खाका
शालाघाट शिमला फोरलेन को लेकर केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्रालय ने एक ऐसा अप्रत्याशित फैसला लिया है जिसने पूरे हिमाचल प्रदेश के सफर की तस्वीर बदलकर रख दी है। इस महात्वाकांक्षी मटौर-शिमला फोरलेन परियोजना के तहत शालाघाट से शिमला के खंड को अब पूरी तरह ‘ग्रीनफील्ड’ यानी एकदम नए सिरे से तैयार किया जाएगा।
आठ किलोमीटर की सीधी कटौती
इस नए अलाइनमेंट के धरातल पर उतरते ही शालाघाट और शिमला के बीच की मौजूदा 33 किलोमीटर की दूरी सिमटकर मात्र 25 किलोमीटर रह जाएगी। इस दुर्गम पहाड़ी रास्ते को सुरक्षित और रफ्तार भरा बनाने के लिए पहाड़ों का सीना चीरकर कुल 5 अत्याधुनिक सुरंगें बनाई जाएंगी।
शालाघाट शिमला फोरलेन का नया अलाइनमेंट और सर्वे
कास्टा इंजीनियरिंग को मिली जिम्मेदारी
नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) ने इस पूरे रूट का तकनीकी सर्वे करने का काम कास्टा इंजीनियरिंग कंपनी को सौंपा है। कंपनी को दिसंबर तक अपनी फाइनल अलाइनमेंट रिपोर्ट एनएचएआई को सौंपनी होगी, जिसके तुरंत बाद राज्य सरकार की मंजूरी लेकर भूमि अधिग्रहण शुरू होगा।
जुब्बड़हट्टी एयरपोर्ट से गुजरेगा हाईवे
प्रस्तावित योजना के मुताबिक शालाघाट शिमला फोरलेन जुब्बड़हट्टी हवाई अड्डे के पास से निकलता हुआ सीधे तारादेवी से जुड़ेगा। इस नए रूट से करीब 223 किलोमीटर लंबे पूरे मटौर-शिमला कॉरिडोर पर कांगड़ा से शिमला के बीच की कुल दूरी लगभग 56 किलोमीटर घट जाएगी।
पुराने रास्ते पर मंडराता संकट टला
पुराने रूट पर राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय, घणाहट्टी और टुटू जैसे घनी आबादी वाले इलाके आते थे, जहां सड़क चौड़ीकरण से सैकड़ों घर और दुकानें तबाह होने का खतरा था। साथ ही नाल्टू, जतोग और बालूगंज में सर्दियों के दौरान भारी बर्फबारी से पूरा मार्ग हफ्तों तक ठप पड़ जाता था।
सफर में समय और ईंधन की भारी बचत
रिहायशी इलाकों को किसी भी विध्वंस से बचाने और 12 महीने निर्बाध ट्रैफिक चलाने के मकसद से ही शालाघाट शिमला फोरलेन को ग्रीनफील्ड रूट पर शिफ्ट करने का यह बड़ा कदम उठाया गया है।






