सरोवर तट पर जीवंत हुआ द्वापर युग: Ajgara Mahotsav की ऐतिहासिक धरती पर उस वक्त सन्नाटा पसर गया जब द्वापर युग की स्मृति अचानक वर्तमान पटल पर जीवंत हो उठी। सरोवर किनारे सजे भव्य मंच पर जब छह आधुनिक यक्षों ने तीखे सवाल दागे, तो हर किसी की सांसें थम गईं। प्राचीन मान्यता वाले इस स्थल पर महाभारत कालीन यक्ष-युधिष्ठिर संवाद को नए सामाजिक संदर्भों के साथ प्रस्तुत किया गया।
एक लाख सवाल और आठ महारथियों की जंग: द ग्रेट अजगरा डिबेट के लिए पूरे प्रतापगढ़ जिले की 1148 ग्राम पंचायतों और 279 वार्डों में गहन मंथन चला। लगभग 1427 प्रतिभागियों में से कड़े बौद्धिक परीक्षण के बाद केवल आठ फाइनलिस्ट ‘अजगरा अष्ट’ के रूप में चुने गए थे। इस बौद्धिक महाकुंभ के दौरान आम जनता से एक लाख से अधिक प्रश्न संकलित किए गए थे।
कलयुग के सबसे बड़े आश्चर्य का खुलासा: Ajgara Mahotsav के मुख्य मंच पर जब यक्षों ने पूछा कि संसार का सबसे बड़ा आश्चर्य क्या है, तो 24 वर्षीय प्रज्ज्वल शुक्ल के तर्कों ने सभी को स्तब्ध कर दिया। इलाहाबाद विश्वविद्यालय से मनोविज्ञान में परास्नातक प्रज्ज्वल ने मनुष्य के अंतहीन लालच को सबसे बड़ा आश्चर्य बताया, जिसके कारण वह सर्वनाश जानते हुए भी नहीं संभलता।
विजेताओं पर हुई धनवर्षा: प्रज्ज्वल शुक्ल ने 85.83 प्रतिशत अंक हासिल कर प्रथम स्थान प्राप्त किया, जिसके लिए उन्हें 1.51 लाख रुपये और प्रशस्ति पत्र से सम्मानित किया गया। वहीं योगेश प्रताप सिंह 84.33 प्रतिशत अंकों के साथ दूसरे स्थान पर रहे और 1 लाख रुपये का पुरस्कार जीता, जबकि राजेंद्र बहादुर पटेल ने 77.33 प्रतिशत अंकों के साथ 75 हजार रुपये का तीसरा पुरस्कार अपने नाम किया।
महाभारत कालीन आस्था और आधुनिक सोच: Ajgara Mahotsav के इस गरिमामयी कार्यक्रम का औपचारिक शुभारंभ जिले के प्रभारी मंत्री मयंकेश्वर शरण सिंह द्वारा किया गया। मान्यता है कि अज्ञातवास के दौरान इसी पावन सरोवर पर यक्ष ने पांडवों की परीक्षा ली थी, जहां आज की युवा पीढ़ी ने समकालीन सामाजिक समस्याओं पर बेबाक तर्क रखकर उस संवाद को नया आयाम दिया।






