रहस्यमयी मौत का खौफनाक सच Nisha Bhagat Suicide की सनसनीखेज खबर ने पूरे झारखंड के सियासी और सामाजिक गलियारों में अचानक हड़कंप मचा दिया है। शुक्रवार को रांची में आदिवासी नेत्री और सरना-सनातन का पक्ष प्रखरता से रखने वाली निशा भगत ने अप्रत्याशित रूप से अपनी जान दे दी, जिसके बाद हर तरफ एक गहरा सन्नाटा और अनसुलझे सवाल पसर गए हैं।
सिस्टम की चुप्पी और बढ़ता आक्रोशNisha Bhagat Suicide केस में उठते सवाल अब प्रशासन की कार्यशैली को कटघरे में खड़ा कर रहे हैं कि आखिर किन भयानक हालातों ने उन्हें यह खौफनाक कदम उठाने पर मजबूर कर दिया। डुमरी विधायक जयराम महतो ने तुरंत मोर्चा खोलते हुए कहा कि मौत से पहले वह फेसबुक लाइव पर रोते हुए थानेदार से गुहार लगा रही थीं, फिर भी समय रहते कोई ठोस कदम क्यों नहीं उठाया गया।
सियासी सफर और निष्कासन का मोड़संघर्षशील सफर का अचानक दर्दनाक अंत उस वक्त सुर्खियों में आया जब जेएलकेएम की पूर्व प्रत्याशी रहीं निशा भगत के इस आत्मघाती फैसले पर चर्चाएं तेज हो गईं। गौरतलब है कि 2024 विधानसभा चुनाव में उन्होंने गुमला से ताल ठोकी थी, मगर बाद में कुर्मी आंदोलन से जुड़े बयान के कारण उन्हें पार्टी से निष्कासित कर दिया गया था।
सीबीआई जांच की गूंज और अंतिम जोहारइंसाफ की लड़ाई और गंभीर आरोप लगाते हुए जयराम महतो ने जमीन दलालों और अफसरों की सांठगांठ पर सीधे तीखे प्रहार किए हैं। उन्होंने निशा भगत के परिजनों को न्याय दिलाने के लिए एसआईटी गठन के साथ-साथ केंद्रीय जांच एजेंसी सीबीआई से उच्चस्तरीय जांच कराने की दो-टूक मांग की है।





