करोड़ों का अस्पताल बना शो-पीस: Basantpur CHC Supaul की चमचमाती इमारत के पीछे एक ऐसा कड़वा सच छिपा है जो हर किसी को हैरान कर देगा। करीब 4 करोड़ 74 लाख रुपये की भारी लागत से तैयार इस अस्पताल से हजारों लोगों को आधुनिक इलाज की उम्मीद थी, लेकिन आज यह केंद्र केवल दिखावा बनकर खड़ा है। भवन तैयार होने और संचालन शुरू होने के बावजूद यहां न इमरजेंसी सेवा है और न ही प्रसव जैसी बुनियादी सुविधा।
संसाधनों की घोर किल्लत: Basantpur CHC Supaul महज एक प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी, पांच डॉक्टरों, एक एएनएम और एक फार्मासिस्ट के सहारे चल रहा है। गंभीर मरीजों और प्रसव पीड़ा से जूझती महिलाओं को इलाज देने के बजाय सीधे दूसरे अस्पतालों में रेफर कर दिया जाता है। हद तो यह है कि इस केंद्र के हिस्से की एंबुलेंस भी वीरपुर अनुमंडलीय अस्पताल में चलाई जा रही है।
Basantpur CHC Supaul पर गहराता सीमावर्ती संकट
सामरिक क्षेत्र में लापरवाही: भारत-नेपाल सीमा के पास स्थित भीमनगर, एसएसबी कैंप और बिहार विशेष सशस्त्र पुलिस प्रशिक्षण केंद्र के कारण यह क्षेत्र अत्यंत संवेदनशील है। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि पुराने पीएचसी में इलाज फिर भी बेहतर था, मगर नए अस्पताल में संसाधन नदारद हैं। जनप्रतिनिधियों से लेकर विभागीय अधिकारियों तक बार-बार गुहार लगाने के बाद भी आज तक स्थिति जस की तस बनी हुई है।
प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी का बयान: डा. अर्जुन चौधरी ने साफ किया है कि डॉक्टरों, स्वास्थ्यकर्मियों और जरूरी उपकरणों की भारी कमी की रिपोर्ट सिविल सर्जन को लिखित व मौखिक रूप से भेजी जा चुकी है। जब तक आवश्यक पद और संसाधन स्वीकृत नहीं होते, तब तक सिर्फ ओपीडी के जरिए मरीजों को देखा जा रहा है।
जनता ने दी आंदोलन की चेतावनी: Basantpur CHC Supaul में बुनियादी सुविधाएं बहाल न होने पर बीरेंद्र गिरी, इंद्रजीत गुप्ता, पूर्व उपमुखिया कन्हैया राम और पंचायत प्रतिनिधियों ने आंदोलन का ऐलान किया है। स्थानीय लोगों की दो-टूक मांग है कि यदि अविलंब प्रसव कक्ष, इमरजेंसी सेवा, पूरे स्टाफ और एंबुलेंस की व्यवस्था नहीं की गई तो सड़क पर उतरकर उग्र प्रदर्शन किया जाएगा।






