Bihar Universities New PhD Rules 2026 के इस बड़े ऐलान ने उच्च शिक्षा की तैयारी कर रहे सूबे के हजारों शोधार्थियों के बीच एक नई हलचल पैदा कर दी है। कुलाधिपति सह राज्यपाल द्वारा स्वीकृत इस नए अध्यादेश के तहत अब सूबे के उच्च शिक्षण संस्थानों में पीएचडी करने के पारंपरिक कायदे-कानून पूरी तरह से बदल दिए गए हैं।
बिना मास्टर्स के भी मिलेगा सीधा प्रवेश: राजभवन द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार अब न्यूनतम 7.5 CGPA के साथ 4 वर्षीय स्नातक (ग्रेजुएशन) प्रतिष्ठा उत्तीर्ण छात्र सीधे शोध कार्य में प्रवेश लेने के हकदार माने जाएंगे। इस बड़े फैसले के बाद अब छात्रों को पीएचडी में दाखिले के लिए अलग से पोस्ट ग्रेजुएशन (Master Degree) करने की कोई अनिवार्य बाध्यता नहीं रहेगी।
पीएटी प्रवेश परीक्षा पर लगी पूरी तरह रोक: इस बार Bihar Universities New PhD Rules 2026 के नियमों के लागू होने के साथ ही विश्वविद्यालयों द्वारा ली जाने वाली पारंपरिक पीएचडी प्रवेश परीक्षा यानी PAT (PhD Admission Test) को पूरी तरह समाप्त कर दिया गया है। राजभवन के कड़े निर्देशों के बाद अब कोई भी विश्वविद्यालय भविष्य में अपने स्तर पर पीएटी परीक्षा का आयोजन या विज्ञापन जारी नहीं कर सकेगा।
नेट स्कोर और इंटरव्यू से ही बनेगा मेरिट: अब राज्य के सभी विश्वविद्यालयों में शोध के लिए केवल वही अभ्यर्थी योग्य होंगे जिन्होंने राष्ट्रीय पात्रता परीक्षा यानी UGC-NET/CSIR-NET या GATE परीक्षा पास की हो। दाखिले के लिए अंतिम मेरिट लिस्ट तैयार करते वक्त नेट स्कोर को 80 प्रतिशत और डिपार्टमेंटल रिसर्च काउंसिल के इंटरव्यू को 20 प्रतिशत का वेटेज दिया जाएगा।
कोर्सवर्क मूल्यांकन के नए कड़े नियम लागू: इसके अलावा नए सत्र से कोर्सवर्क में शामिल होने वाले शोधार्थियों को अपनी थीसिस जमा करने से पहले न्यूनतम 55 प्रतिशत अंक हासिल करना अनिवार्य होगा। इस नई व्यवस्था में कुल 100 अंकों की परीक्षा होगी जिसमें 30 अंक आंतरिक मूल्यांकन के और 70 अंक मुख्य सैद्धांतिक परीक्षा के निर्धारित किए गए हैं






