नई शिक्षा नीति के दावों के बीच चौंकाने वाली हकीकत Digital Learning in Schools को लेकर शिक्षा मंत्रालय द्वारा जारी किए गए वर्ष 2025-26 के नवीनतम सर्वे ने पूरे देश की शिक्षा व्यवस्था पर एक गंभीर सवालिया निशान लगा दिया है। जहां एक तरफ देश में नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) के तहत आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और कोडिंग सिखाने की बड़ी-बड़ी बातें की जा रही हैं, वहीं दूसरी तरफ जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है। देश के कुल 784 जिलों में से 327 जिले ऐसे पाए गए हैं जो डिजिटल शिक्षा के मोर्चे पर बुरी तरह पिछड़ चुके हैं।
बिहार, बंगाल और उत्तर प्रदेश में स्थिति बेहद चिंताजनक 40 प्रतिशत जिलों का प्रदर्शन निराशाजनक: इस राष्ट्रीय सर्वे में सामने आया है कि Digital Learning in Schools के मामले में बिहार और पश्चिम बंगाल के शत-प्रतिशत यानी सभी जिले फिसड्डी साबित हुए हैं। उत्तर प्रदेश के भी 75 जिलों में से 67 जिले और झारखंड के 24 में से 23 जिले इस श्रेणी में न्यूनतम 30 प्रतिशत का स्कोर भी हासिल नहीं कर पाए हैं। इसके अलावा मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, जम्मू-कश्मीर और असम के भी अधिकांश जिले इस परीक्षा में पास नहीं हो सके हैं।
पांच कड़े मानकों पर हुई थी स्कूलों की अग्निपरीक्षा इन पैमानों पर परखी गई डिजिटल शिक्षा: शिक्षा मंत्रालय ने कुल 600 अंकों के इस विस्तृत सर्वे में डिजिटल शिक्षा के लिए 50 अंक निर्धारित किए थे, जिसके तहत पांच कड़े मानक तय किए गए थे। इनमें स्कूलों में इंटरनेट सुविधा, कंप्यूटर व लैपटॉप की उपलब्धता, स्मार्ट क्लासरूम का ढांचा, प्रति कंप्यूटर बच्चों का अनुपात और कंप्यूटर के माध्यम से पढ़ाने के लिए प्रशिक्षित शिक्षकों की तैनाती शामिल थी। हालांकि, इस कसौटी पर केवल चंडीगढ़, केरल, तमिलनाडु, महाराष्ट्र, तेलंगाना, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड जैसे राज्य ही बेहतर प्रदर्शन कर पाए हैं।
इंफ्रास्ट्रक्चर में हुआ सुधार लेकिन लर्निंग आउटकम अभी भी बेअसर परफॉर्मेंस ग्रेडिंग इंडेक्स में खुली पोल: मंत्रालय की पीजीआई रिपोर्ट 2025-26 के अनुसार, इंफ्रास्ट्रक्चर के मामले में 784 में से 523 जिले जरूर उत्कर्ष और उत्तम श्रेणी में पहुंचे हैं, लेकिन जब बात बच्चों के सीखने के परिणाम यानी लर्निंग आउटकम की आती है, तो 540 जिले अभी भी प्रचेष्टा और आकांक्षी श्रेणी में अटके हुए हैं। रिपोर्ट स्पष्ट करती है कि 50 प्रतिशत या उससे कम अंक पाने के कारण देश का एक बहुत बड़ा हिस्सा Digital Learning in Schools के वास्तविक लाभ से कोसों दूर खड़ा है।






