चौंकाने वाला बड़ा बयान: DK Shivakumar Statement ने बेंगलुरु के मंच पर अचानक एक नया सियासी और वैचारिक विमर्श खड़ा कर दिया है। 2 सितंबर को एक भव्य मंच से दिए गए इस बयान में उन्होंने रामायण के संदर्भ को उठाकर सीधे तौर पर माता सीता के त्याग और संघर्ष को भगवान राम से भी अधिक महान करार दिया।
महिलाओं की वास्तविक ताकत: यह पूरा घटनाक्रम उबंटू कंसोर्टियम ऑफ वुमन एंटरप्रेन्योरशिप एसोसिएशन के पांचवें संस्करण ‘टुगेदर वी ग्रो-इंटरनेशनल वुमन एंटरप्रेन्योरशिप डे’ के उद्घाटन के दौरान घटित हुआ। उन्होंने स्पष्ट रेखांकित किया कि महिलाएं समाज की वास्तविक सृजनकर्ता हैं और गंभीर चुनौतियों का सामना कर उद्यम खड़ा करने वाली हर महिला सच्ची रोल मॉडल है।
DK Shivakumar Statement: लीडरशिप और त्याग की नई परिभाषा
संसद तक भागीदारी की पुकार: उन्होंने जोर देकर कहा कि आधी आबादी को अब महज पीछे खड़े रहने के बजाय ग्राम पंचायत स्तर से लेकर देश की संसद तक सीधे निर्णायक भूमिकाओं में उतरना होगा। शासन प्रणाली के प्रत्येक स्तर पर महिला नेतृत्व की अनिवार्यता को बताते हुए उन्होंने राज्य सरकार की पूर्ण प्रतिबद्धता जताई।
असीमित सामर्थ्य का संगम: DK Shivakumar Statement के अनुसार जब नारी शक्ति की रचनात्मकता और दृढ़ संकल्प को पूंजी, आधुनिक तकनीक और बाजार का समर्थन मिलता है, तब उनकी प्रगति की कोई तय सीमा नहीं रह जाती। एक सुरक्षित व अनुकूल वातावरण तैयार करना लोकतांत्रिक सरकार का मुख्य दायित्व बन जाता है।
सरकारी गारंटियों का मजबूत आधार: महिलाओं और युवाओं के सशक्तिकरण को जमीन पर उतारने के लिए शक्ति, गृह लक्ष्मी, गृह ज्योति, अन्न भाग्य और युवा निधि जैसी पांच प्रमुख गारंटी योजनाओं का उल्लेख किया गया। शक्ति योजना ने महिलाओं में आत्मनिर्भरता की नई लहर पैदा की है, तो वहीं गृह लक्ष्मी योजना से 1.22 करोड़ महिलाओं को सीधे आर्थिक संबल मिल रहा है।






