चौंकाने वाला बदलाव सामने आया: एटा में कुपोषण के खिलाफ चल रही ऐतिहासिक जंग में जनपद ने पूरे उत्तर प्रदेश में अपनी जबरदस्त धाक जमाकर सबको चौंका दिया है। प्रशासनिक दांव-पेच और निरंतर निगरानी ने इस जिले को प्रदेश की रैंकिंग में सीधे चौथे पायदान पर पहुंचा दिया है।
चुनौतियों के बीच दर्ज हुई बड़ी जीत: एटा में कुपोषण को जड़ से खत्म करने के लिए चलाए गए अभियान में 88.61 प्रतिशत सफलता दर दर्ज की गई है। पिछले तीन महीनों के भीतर 388 अति कुपोषित बच्चों को सामान्य श्रेणी में लाकर जीवनदान देने का साहसिक काम किया गया।
पोषण अभियान और एटा में कुपोषण मुक्ति की रणनीति
अभियान का महा-सर्वेक्षण: महिला एवं बाल विकास विभाग की सक्रियता: महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा चलाए गए सघन अभियान के तहत जिले भर के कुल 1,48,785 बच्चों का शारीरिक मापन किया गया।
आंकड़ों ने खोला बड़ा सच: सख्त निगरानी के नतीजे: सर्वे के दौरान जिले के सभी आठ विकासखंडों और नगर क्षेत्र में अति कुपोषण के केवल 63 नए मामले सामने आए, जबकि 376 बच्चे मध्यम कुपोषित श्रेणी में चिह्नित किए गए।
विशेष पुनर्वास केंद्रों की भूमिका: संभव अभियान का असर: संभव अभियान और पोषण माह के संयुक्त प्रयासों से गंभीर बच्चों को पोषण पुनर्वसन केंद्र (NRC) का पूरा लाभ दिलाकर सामान्य श्रेणी में लाया गया।
शीर्ष जिलों में बनाई जगह: प्रदेश में चौथा मुकाम: लखीमपुर खीरी, जालौन और हापुड़ के बाद एटा जनपद ने पूरे उत्तर प्रदेश में उत्कृष्ट कार्य कर चौथा स्थान हासिल किया है।
अधिकारियों ने तय किया नया लक्ष्य: शून्य कुपोषण का संकल्प: जिला कार्यक्रम अधिकारी संजय सिंह और जिला समन्वयक संजीव पचोरी के अनुसार, जिले में बचे 159 अति कुपोषित और 563 कुपोषित बच्चों को भी जल्द सामान्य श्रेणी में लाने के लिए निरंतर निगरानी जारी है।
ब्लॉकवार कुपोषण की वर्तमान स्थिति:
- अलीगंज: 15 अति कुपोषित | 77 कुपोषित
- अवागढ़: 18 अति कुपोषित | 85 कुपोषित
- जैथरा: 23 अति कुपोषित | 157 कुपोषित
- जलेसर: 32 अति कुपोषित | 63 कुपोषित
- मारहरा: 28 अति कुपोषित | 46 कुपोषित
- निधौली कला: 24 अति कुपोषित | 61 कुपोषित
- सकीट: 7 अति कुपोषित | 29 कुपोषित
- शीतलपुर: 10 अति कुपोषित | 36 कुपोषित
- नगर क्षेत्र: 02 अति कुपोषित | 09 कुपोषित






